प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों, चाहे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हों या ममता-माया-मुलायम, जो भी हों, यहां सबके रेट बराबर हैं। मात्र नब्बे रुपये में मिलेंगे। और हां, अब ये सब पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में किसी न किसी के सिर पर भी विराजमान होंगे। कोई इन्हें हाथ में लेकर दौड़ रहा होगा तो कोई अपनी गाड़ी में इन्हें बैठाकर सफर कर रहा होगा।
अगर ये सिर पर सवार हैं तो समझें कि यह काम मात्र एक रुपया या डेढ़ रुपये में हो जाएगा। अगर गले लगा रहे हैं तो 30 से 40 रुपये खर्च आएगा। एक बात और, ये सब नेता भी जीएसटी की मार से नहीं बच सके हैं। जीएसटी ने इनके रेट करीब बीस फीसदी तक बढ़ा दिए हैं।
यहां मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ, तेलंगाना और मिजोरम में होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान प्रचार के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री की बात हो रही है। दिल्ली के सदर बाजार में ऑर्डर बुक होने लगे हैं। चूंकि इन पांच राज्यों में अगले माह चुनाव है, इसलिए विभिन्न पार्टियों ने अपने-अपने हिसाब से प्रचार सामग्री का ऑर्डर देना शुरू कर दिया है। झंडे, बैनर-पोस्टर, गले में डलने वाला पटका, टोपी, बिल्ले, पैन और आई कार्ड लटकाने वाली डोरी, यह सब बनकर तैयार हैं।
सदर बाजार में चुनाव सामग्री के थोक विक्रेता विक्रम सिंह का कहना है कि ऑर्डर आने लगे हैं, मगर पहले वाली बात नहीं है। पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार प्रचार सामग्री का बाजार ठंडा है। वजह बताते हुए बोले, महंगाई सबसे बड़ा कारण है। दूसरा, चुनाव आयोग में खर्च का ब्यौरा देना, इनकी वजह से बाजार उठ नहीं पा रहा है। रही-सही कसर जीएसटी ने पूरी कर दी।
चूंकि अधिकांश आइटम कपड़े से बनते हैं, इसलिए इन पर जीएसटी लग गया है। पहले एक-एक रैली के लिए लाख टी-शर्ट का ऑर्डर मिलता था, अब वह सैंकड़ों या हजार में सिमट गया है। दूसरे विक्रेता रोहित का कहना है कि जीएसटी ने काफी कुछ बिगाड़ दिया है। पहले मोदी-राहुल या किसी अन्य नेता के फोटो वाली एक टी-शर्ट पचास रुपये में पड़ती थी।
अब वही टी-शर्ट नब्बे रुपये तक जा पहुंची है। पार्टी के रंग वाला सामान्य बिल्ला है तो वह डेढ़ रुपये में बनता है। अगर इसी पर नेता का फोटो लगा है तो उसका रेट एक रुपया अस्सी पैसे हो जाता है। अच्छी क्वालिटी लेनी है तो ढाई रुपये लगेंगे। पांच हजार पीस से कम का ऑर्डर नहीं लिया जाएगा।