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Explainer: जेन जी के बाद जेन अल्फा सड़कों पर, क्यों अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन कर रहे बच्चे, इनका असर कितना?

Thu, 20 Aug 2026 05:38 PM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

जेन जी के बाद अब जेन अल्फा भी अपनी आवाज बुलंद कर रही है। देश के कई हिस्सों में स्कूली बच्चे सड़क पर उतरकर शिक्षक, सुरक्षित स्कूल, सड़क, बिजली-पानी और बेहतर सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। खास बात यह है कि कई जगह बच्चों के दबाव के बाद प्रशासन को कार्रवाई भी करनी पड़ी। आइए विस्तार से जानते हैं।
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जेन अल्फा का प्रदर्शन - फोटो : Ai
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विस्तार
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हाल में नीट पेपर लीक के खिलाफ देशभर में जेन जी के प्रदर्शन देखने को मिले थे। अपनी मांगों को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन तब तक थमा नहीं, जब तक प्रदर्शन कर रहे युवाओं की मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई। अब कुछ वैसा ही विरोध देश के अलग-अलग हिस्सों में जेन अल्फा के बीच भी देखने को मिल रहा है। 

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हाल के दिनों में झारखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, पंजाब और महाराष्ट्र की कई जगहों से स्कूली बच्चों के प्रदर्शन सामने आए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जेन अल्फा कौन हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों में इन बच्चों को प्रदर्शन करने की जरूरत क्यों पड़ रही है? इन प्रदर्शनों का क्या असर हो रहा है? आइये जानते हैं...

जेन अल्फा कौन हैं?

2012 से 2024 के बीच जन्मे बच्चों को जेन अल्फा कहा जाता है। यह वह पीढ़ी है जो जन्म से ही इंटरनेट, स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बीच बड़ी हुई है। इस पीढ़ी के बच्चों ने तकनीक को बाद में अपनाया नहीं, बल्कि उनके बचपन का बड़ा हिस्सा डिजिटल दुनिया के बीच बीता है। टैबलेट, वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन पढ़ाई, वीडियो कॉल, वर्चुअल क्लासरूम और स्मार्ट डिवाइस इनके लिए सामान्य चीजें हैं।

जेनरेशन अल्फा नाम का इस्तेमाल सबसे पहले ऑस्ट्रेलियाई रिसर्चर मार्क मैक्रिंडल ने 2008 में किया था। जेन एक्स, जेन वाई यानी मिलेनियल्स और जेन जी के बाद यह पहली पीढ़ी है, जिसका नाम अंग्रेजी अल्फाबेट के बजाय ग्रीक अल्फाबेट के अक्षर पर रखा गया। 

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जेन अल्फा का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

देश में कहां-कहां कर रहे जेन अल्फा प्रदर्शन?

प्रधानाध्यापक के तबादले का विरोध
झारखंड के गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड स्थित दो स्कूलों में छात्रों ने अपने प्रधानाध्यापक मलय कुमार सिंह के तबादले के विरोध में प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना था कि उनके प्रधानाध्यापक के आने के बाद स्कूल में पढ़ाई और अनुशासन का माहौल बेहतर हुआ था। इसलिए उनके तबादले को छात्र हित में सही नहीं माना जा सकता।

मामला बढ़ने पर सैकड़ों छात्र सड़क पर उतर आए। उन्होंने मुख्य मार्ग को जाम कर दिया और टायर जलाकर विरोध जताया। छात्र सिर्फ स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन करके नहीं रुके, बल्कि उनका एक प्रतिनिधिमंडल करीब 100 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय गढ़वा पहुंचा और उपायुक्त से मुलाकात कर अपनी मांग रखी। छात्रों ने कहा कि जब तक प्रधानाध्यापक को वापस नहीं लाया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

छात्रों के दबाव के बाद शिक्षा विभाग ने 13 अगस्त को मलय कुमार सिंह को दोबारा कांडी उच्च विद्यालय में प्रधानाध्यापक के रूप में पदस्थापित करने का आदेश जारी कर दिया। यानी यहां छात्रों की मांग पर प्रशासन को फैसला लेना पड़ा।

जेन अल्फा का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बुनियादी जरूरतों को लेकर प्रदर्शन

खराब सड़क को लेकर प्रदर्शन
हमीरपुर जिले में स्कूली बच्चे स्कूल जाने वाली बदहाल सड़क की समस्या लेकर कलेक्ट्रेट पहुंच गए। भौली और बचरौली गांव के बच्चों का कहना था कि स्कूल जाने वाली सड़क लंबे समय से खराब है। बारिश के दिनों में रास्ता दलदल में बदल जाता है, जिससे बच्चों को स्कूल पहुंचने में काफी परेशानी होती है।
बच्चों ने बताया कि इस रास्ते से गुजरते समय उनकी ड्रेस गंदी हो जाती है और कई बार बच्चे फिसलकर घायल भी हो जाते हैं। सड़क बनवाने की मांग को लेकर बच्चे स्कूल जाने के बजाय कलेक्ट्रेट की तरफ निकल पड़े। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन बच्चे गलियों और कच्चे रास्तों से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंच गए। इसके बाद छात्र और ग्रामीण करीब पांच से छह घंटे तक धरने पर बैठे रहे। प्रशासन की ओर से जल्द कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।

बिजली-पानी की मांग
फतेहपुर जिले के सर्वोदय इंटर कॉलेज, किशनपुर में भी छात्रों ने स्कूल की बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रदर्शन किया। 28 जुलाई को छात्रों ने स्कूल में बिजली और साफ पेयजल की कमी का मुद्दा उठाया। छात्रों का कहना था कि लंबे समय से इन सुविधाओं की कमी बनी हुई है।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने नियमित बिजली, स्वच्छ पेयजल और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। छात्रों के विरोध के बाद अगले ही दिन स्कूल प्रशासन ने व्यवस्थाओं में सुधार का काम शुरू कर दिया। कक्षाओं में पंखे लगाने और खराब पंखों को ठीक कराने का काम शुरू हुआ। अधिकारियों ने भी स्कूल पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

शिक्षकों, भोजन और इलाज को लेकर प्रदर्शन
लखनऊ के पारा क्षेत्र स्थित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय की छात्राओं ने 17 अगस्त को स्कूल की व्यवस्थाओं के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्राओं की शिकायत थी कि स्कूल में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसके अलावा मेस के खाने की गुणवत्ता और बीमार पड़ने पर समय पर इलाज नहीं मिलने को लेकर भी छात्राएं नाराज थीं।
सुबह करीब छह बजे छात्राएं स्कूल परिसर से बाहर निकलीं और करीब चार किलोमीटर दूर दुबग्गा-कानपुर बाईपास चौराहे तक पहुंच गईं। मूसलाधार बारिश के बावजूद वे हाईवे पर धरने पर बैठ गईं। इसके कारण एंबुलेंस, स्कूली वाहनों और दूसरे वाहनों समेत सैकड़ों गाड़ियां फंस गईं और करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया। छात्राओं का कहना था कि इन समस्याओं को लेकर पहले भी शिकायत की जा चुकी है, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

250 छात्रों ने लगाया जाम
उन्नाव के न्योतनी नगर पंचायत स्थित जयप्रकाश नारायण सर्वोदय आवासीय विद्यालय में करीब 250 छात्र सड़क पर उतर आए। छात्रों ने मोहान चौराहे पर धरना देकर जाम लगा दिया। उनकी शिकायत थी कि स्कूल में गुणवत्तापूर्ण खाना नहीं मिलता, पेयजल की व्यवस्था ठीक नहीं है और पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक भी नहीं हैं।

छात्रों ने स्कूल प्रशासन के व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताई। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर छात्रों से बातचीत की और उनकी समस्याओं का समाधान कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद करीब ढाई घंटे चला धरना समाप्त हुआ।

हाईटेंशन लाइन हटाने की मांग
कन्नौज के जरिहापुर गांव के कंपोजिट स्कूल के छात्रों ने 11 अगस्त को स्कूल के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्रों और ग्रामीणों का कहना था कि जर्जर तारों से लगातार हादसे का खतरा बना हुआ है। कई बार तार टूटकर नीचे गिरने से बड़ा हादसा टल चुका है।

छात्रों ने मांग की कि हाईटेंशन लाइन को स्कूल परिसर से बाहर स्थानांतरित किया जाए। अधिकारियों ने मामले की जांच कराने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद इसे हटा भी दिया गया।

राजस्थान में क्यों हो रहा प्रदर्शन?

जर्जर स्कूल भवन का मुद्दा
अलवर जिले के थानागाजी क्षेत्र के जोधावास स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में जर्जर भवन को लेकर छात्रों और ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। स्कूल की छतों से पट्टियां टूटकर गिर रही थीं और दीवारों में दरारें आ चुकी थीं। ऐसे माहौल में बच्चों को पढ़ाई करने में हादसे का डर बना हुआ था।

छात्रों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन कर प्रशासन से सवाल किया कि अगर उनके बच्चे ऐसी स्थिति में पढ़ते तो क्या उन्हें भी यही सुविधा दी जाती। ग्रामीणों का कहना था कि जर्जर भवन की शिकायत पहले भी की जा चुकी है, लेकिन समाधान नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि स्कूल भवन की जल्द मरम्मत कराई जाए या नए कमरों की व्यवस्था की जाए।

शिक्षकों की कमी पर तालाबंदी
भरतपुर जिले के सैदपुरा स्थित राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी को लेकर छात्रों और ग्रामीणों ने स्कूल के मुख्य गेट पर ताला लगाकर प्रदर्शन किया। छात्रों ने खाली पदों पर जल्द शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की।

छात्रों का कहना था कि शिक्षकों की कमी से उनकी पढ़ाई और भविष्य प्रभावित हो रहा है। इससे पहले 13 जुलाई को भी इसी मांग को लेकर स्कूल में तालाबंदी की गई थी। उस समय शिक्षा विभाग ने जल्द नियुक्ति का आश्वासन दिया था, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर छात्रों ने दोबारा प्रदर्शन किया।

जेन अल्फा का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

मध्य प्रदेश में जेन अल्फा क्यों कर रहे प्रदर्शन?

विदिशा जिले के सिरोंज बस स्टैंड पर 13 अगस्त को दर्जनों स्कूली छात्राओं ने बस किराया बढ़ाए जाने के खिलाफ प्रदर्शन किया। ग्रामीण इलाकों से पढ़ने आने वाली छात्राओं का कहना था कि किराया बढ़ने से उनके लिए स्कूल आना मुश्किल हो सकता है और उनकी पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा है। छात्राओं ने किराया कम करने की मांग की। करीब आधे घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद एसडीएम मौके पर पहुंचे और मामले की समीक्षा कर जल्द समाधान निकालने का आश्वासन दिया।

स्कूल को स्थानांतरित करने का विरोध
उज्जैन में शासकीय सराफा कन्या विद्यालय की छात्राएं अपने स्कूल को दूसरी जगह स्थानांतरित किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में सड़क पर उतर आईं। 14 अगस्त को छात्राओं ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान छात्राओं के भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आए।

प्रदर्शन के बाद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने स्कूल को दूसरी जगह स्थानांतरित नहीं करने का फैसला किया। साथ ही क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था बेहतर करने के लिए दो नए सीएम राइज स्कूल खोलने की घोषणा की गई।

स्कूल की पहचान बचाने की मांग
भोपाल में रीजनल स्कूल के करीब 300 से 400 छात्र-छात्राएं स्कूल को केंद्रीय विद्यालय संगठन में शामिल किए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ सड़क पर उतर आए। छात्रों ने ‘सेव डीएमएस’ के पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया और स्कूल की मौजूदा पहचान बनाए रखने की मांग की। छात्रों ने स्कूल प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर संविलयन की प्रक्रिया रोकने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
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और कहां-कहां हो रहा प्रदर्शन?

रायगढ़ में मोबाइल को बनाया माइक

महाराष्ट्र के रायगढ़ में तीन स्कूली छात्राओं ने खराब सड़क और गड्ढों की समस्या को अलग तरीके से सामने रखा। 15 साल की छात्राओं ने छाते को माइक बनाया और मोबाइल से वीडियो शूट कर अपने गांव की सड़क की स्थिति की रिपोर्टिंग की। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया और सड़क की मरम्मत कराई।

गया में स्कूल की अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन
बिहार के गया जिले के डुमरिया प्रखंड में 18 अगस्त को चहरा-पहरा मध्य विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने ग्रामीणों के साथ प्रखंड मुख्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। छात्रों और ग्रामीणों ने मिड-डे मील में तय मेन्यू का पालन नहीं होने, फर्जी उपस्थिति के आधार पर चावल और सरकारी राशि उठाने, प्रमाण-पत्र के नाम पर प्रति छात्र 500 रुपये मांगने, स्कूल विकास मद की राशि के कथित दुरुपयोग और गरीब SC-BC बच्चों के साथ भेदभाव समेत कई आरोप लगाए। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने स्कूल की प्रभारी प्रधानाध्यापिका से 24 घंटे के भीतर साक्ष्य सहित जवाब मांगा।

कपूरथला में शिक्षक के तबादले का विरोध
पंजाब के कपूरथला के शेखूपुर स्थित सरकारी हाई स्कूल में बड़ी संख्या में छात्राओं ने स्कूल का मुख्य गेट बंद कर धरना दिया। उनकी मुख्य मांग एक लोकप्रिय शिक्षक का तबादला रद्द करना था। इसके अलावा छात्राओं ने स्कूल परिसर के बीच बने बाथरूम के पास से गुजर रही हाई वोल्टेज बिजली की तारों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग भी की।

पुलिस और अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर छात्राओं और उनके अभिभावकों से बातचीत की। उनकी समस्याओं को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने और जल्द समाधान कराने का आश्वासन दिया गया।

बुनियादी सुविधाओं से जुड़े हैं ज्यादातर मुद्दे

जेन अल्फा के इन प्रदर्शनों को देखें तो ज्यादातर मांगें किसी बड़ी या असाधारण चीज से जुड़ी नहीं हैं। बच्चे स्कूल में शिक्षक, सुरक्षित भवन, साफ पानी, अच्छा भोजन, बिजली, सुरक्षित रास्ता और बेहतर पढ़ाई जैसी बुनियादी सुविधाएं मांग रहे हैं। कहीं वे अपने पसंदीदा शिक्षक को वापस लाने की मांग कर रहे हैं, तो कहीं स्कूल की पहचान बचाने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं।

इन प्रदर्शनों की एक खास बात यह भी है कि कई मामलों में बच्चों ने अपनी मांग सिर्फ स्कूल प्रशासन तक सीमित नहीं रखी। वे सड़क पर आए, कलेक्ट्रेट पहुंचे, अधिकारियों से मिले और अपनी बात सीधे प्रशासन के सामने रखी। कई जगह उनके प्रदर्शन के बाद प्रशासन की ओर से कार्रवाई या समाधान का आश्वासन भी दिया गया।
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