उत्तराखंड की तरह अरुणाचल प्रदेश में भले ही भाजपा अदालती लड़ाई हार गई है, मगर सियासी लड़ाई में पार्टी अब भी कांग्रेस पर भारी है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद कांग्रेस भले ही वहां सरकार बना ले, मगर उसके लिए सरकार बचाना बेहद मुश्किल है।
चूंकि कांग्रेस के 20 बागी विधायक के अलावा पीपीए के 5 और 2 निर्दलीय विधायक अब भी भाजपा के साथ है। इसलिए भाजपा अदालती लड़ाई हारने के बावजूद सियासी लड़ाई में कांग्रेस को चारो खाने चित करने को ले कर निश्चिंत है। पार्टी की योजना कांग्रेस की सरकार बनते ही उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का है। गौरतलब है कि शीर्ष अदालत का फैसला कांग्रेस के पक्ष में आते ही पार्टी नेतृत्व ने राज्य इकाई को समर्थक विधायकों को अपने पक्ष में एकजुट रखने के लिए सतर्क कर दिया है।
हालांकि भाजपा नेतृत्व को उत्तराखंड की तर्ज पर अरुणाचल प्रदेश में भी विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बागी विधायकों को अयोग्य करार देने का डर सता रहा है। भाजपा के एक वरिष्ठ रणनीतिकार के मुताबिक शीर्ष अदालत के फैसले के बाद भी अरुणाचल की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा।