नगालैंड विधानसभा ने सोमवार को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र से उत्तर पूर्व और विशेष रूप से नगालैंड से सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (अफ्स्पा) को वापस लेने की मांग की। इस महीने की शुरुआत में राज्य के मोन जिले में सुरक्षा बलों द्वारा फायरिंग में 14 नागरिकों के मारे जाने के मामले में सोमवार को विधानसबा में निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। नगालैंड पुलिस ने कहा था कि सेना के 21 पैरा स्पेशल फोर्स ने नागरिकों की हत्या और घायल करने के इरादे से गोलीबारी की थी।
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सोमवार को नगालैंड विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया, जिसका अर्थ है कि राज्य के भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने भी इसका समर्थन किया। नगालैंड सरकार का नेतृत्व भाजपा की सहयोगी नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी कर रही है। प्रस्ताव में अधिकारियों से हत्याओं पर माफी मांगने और न्याय दिलाने का आश्वासन भी मांगा गया है। 4 दिसंबर की शाम को सेना के 21 पैरा स्पेशल फोर्स ने नगालैंड के मोन जिले में तिरु से ओटिंग तक कोयला खनिकों को ले जा रही एक पिकअप वैन पर गोलियां चलाई थीं, जिसमें छह लोग मारे गए थे। उन्होंने गलती से श्रमिकों को विद्रोही समझ लिया था।
हत्याओं से नाराज प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने सेना के वाहनों में आग लगा दी थी। इस सुरक्षाबलों ने फिर से गोलियां चलाईं, जिसमें सात और नागरिक मारे गए। स्थानीय लोगों द्वारा सोम के जिला मुख्यालय में असम राइफल्स के एक शिविर में प्रवेश करने के बाद दोबारा हिंसा फैल गई थी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की गोलीबारी में कम से कम एक और व्यक्ति की मौत हो गई थी।