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मायावती की जल्दबाजी ने बिगाड़ा म.प्र. में कांग्रेस से गठबंधन का खेल

Sat, 06 Oct 2018 09:21 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और यूपीए चेयरपर्सन दोनों चाहते थे कि म.प्र. में बसपा के साथ गठबंधन हो, लेकिन मायावती की जल्दबाजी ने महागठबंधन का खेल उलट-पुलट दिया। कांग्रेस पार्टी मायावती को 30-35 सीट तक देने का मन बना चुकी थी। 

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सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस और बसपा के बीच में कौन सी सीटें गठबंधन में बसपा के खाते में जानी हैं, इसको लेकर गतिरोध था। लेकिन मायावती ने अपनी तरफ से जल्दबाजी दिखा दी। 22 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा के साथ राज्य में बसपा के अकेले चुनाव लड़ने का एलान दिया। 

मायावती और म.प्र. कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और मायावती के बीच बातचीत का पहला दौर असफल रहने के बाद कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने ही बातचीत का दूसरा दौर शुरू कराया था। सूत्र बताते हैं कि बसपा की तरफ सतीश चंद्र मिश्र का रोल इसमें अहम था। इसके पीछे कांग्रेस अध्यक्ष और यूपीए चेयरपर्सन की सोच 2019 का लोकसभा चुनाव था। दोनों का मानना था कि बसपा से राज्य स्तर का गठबंधन होने के बाद लोकसभा में महागठबंधन की राह आसान हो जाएगी। 
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कांग्रेस पार्टी राजस्थान में बसपा से समझौते के पक्ष में नहीं थी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट और कांग्रेस महासचिव तथा राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पार्टी के अकेले चुनाव में जाने के पक्ष में थे। हालांकि बसपा में कांग्रेस के साथ चुनाव गठबंधन करना चाहती थी। वहीं कांग्रेस की इच्छा म.प्र. और छत्तीसगढ़ में बसपा से तालमेल की थी, लेकिन मायावती ने अजीत जोगी की पार्टी के तालमेल करने में रुचि दिखाई। इसके बाद बारी म.प्र. की थी।

मायावती ने यहां 50 सीटें मांगी थी। हालांकि कभी भी बसपा 15 सीट से अधिक पर जीतने लायक प्रभाव नहीं दिखा पाई। म.प्र. के अध्यक्ष कमलनाथ अधिकतम 20 सीटें ही बसपा को देने के पक्ष में थे। लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष ने पहल करके इसे 30 सीट तक करने को कहा था। इस बारे में म.प्र. प्रदेश कांग्रेस के रणनीतिकारों का कहना था कि बसपा जिन सीटों को मांग रही है, उसे देना मुश्किल होगा, क्योंकि वहां बसपा का जनाधार नहीं है। दूसरे इन सीटों को देने से करीब एक दर्जन सीटों पर भाजपा को सीधा फायदा हो जाएगा।
 

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बसपा के साथ आने से होता फायदा

म.प्र. कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी दोनों का मानना है कि बसपा के साथ आने का चुनाव में लाभ जरूर मिलता। इसे ध्यान में रखकर ही कांग्रेस अध्यक्ष ने वहां की प्रदेश इकाई को 30 सीटें बसपा के खाते में देने के लिए रूपरेखा तैयार करने को कहा था। लेकिन यह सब हो पाता कि इसके पहले ही मायावती ने अकेले चुनाव में जाने का एलान कर दिया। कांग्रेस पार्टी के नेताओं के अनुसार इसके बाद भी कोशिश चल रही थी, लेकिन अंतत: बात नहीं बन पाई। इस तरह से बसपा और कांग्रेस तीन राज्यों के चुनाव में साथ नहीं आ सके। 

फिर भी जीत लेंगे चुनाव

कांग्रेस पार्टी को भरोसा है कि बसपा के साथ गठबंधन न होने के बाद भी वह म.प्र. में सरकार बनाने के लिए विधानसभा चुनाव में जरूरी संख्या पा जाएगी। हालांकि म.प्र.(231 सीट), राजस्थान(200सीट), छत्तीसगढ़(91 सीट) के विधानसभा चुनाव प्रचार में राहुल गांधी सबसे अधिक समय राजस्थान और म.प्र. को दे रहे हैं। 
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