बीएचयू विवाद गहराने से वाइस चांसलर गिरीश चंद्र त्रिपाठी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सेवा विस्तार से लेकर यूजीसी चेयरमैन बनने के उनके सपनों पर ग्रहण लगने के आसार हैं। बीएचयू में लड़कियों पर शनिवार को हुए लाठी चार्ज के मामले को लेकर फजीहत झेलने के बाद अब बीजेपी आलाकमान ने भी मामले में अपनी सक्रियता बढ़ाई है। दिल्ली में हुई बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में भी बीएचयू का मुद्दा चर्चा में रहा।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बीएचयू की घटना को दुर्भाग्यपुर्ण बताया है। बताया जा रहा है कि बीजेपी आलाकमान के हरकत में आने के बाद ही प्रदेश की योगी सरकार ने स्थानीय पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने इस मामले में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बातचीत की है।
मसला पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र से जुड़े होने की वजह से बीजेपी आलाकमान मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। इस बीच बीएचयू के ताजे विवाद में वाइस चांसलर गिरीश चंद्र त्रिपाठी पर फिलहाल किसी बड़े कार्रवाई के आसार नहीं हैं। चूंकि त्रिपाठी सीधे संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल की पसंद बताए जा रहे हैं। लेकिन भविष्य के लिए उनके लिए आगे के रास्ते अब बंद हो सकते हैं।
यूजीसी चेयरमैन की दौड में शामिल हैं त्रिपाठी का नाम
सूत्र बताते हैं कि लड़कियों पर लाठी चलाने के मामले को लेकर बीएचयू वाइस चांसलर गिरीश चंद्र त्रिपाठी की मुश्किलें बढ़नी तय मानी जा रही हैं। संघ सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल का करीबी होने की वजह से उनपर हाल फिलहाल कोई बड़ी कार्रवाई न हो, मगर उनके सेवा विस्तार का मामला खटाई में पड़ सकता है।
बीएचयू वाइस चांसलर पद पर त्रिपाठी का कार्यकाल 25 नवंबर तक है। इस पद पर उनकी नियुक्ति 26 नवंबर 2014 को हुई थी। यही नहीं यूजीसी चेयरमैन बनने के उनके सपने को भी अब ग्रहण लग गया है। बताया जा रहा है कि यूजीसी चेयरमैन के लिए कुछ नामों की सूची बनी है उसमें त्रिपाठी का नाम भी शामिल है। मगर उनकी अक्षमता सामने जाहिर होने के बाद इस पद पर अब उनके पिछड़ने के आसार हैं।
यही नहीं उनकी नजर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय के वाइस चांसलर पद पर भी थी। लेकिन इस पद के लिए भी अब वे रेस से बाहर माने जा रहे हैं। सरकार के उच्च सूत्रों की मानें तो लड़कियों पर लाठी चलाने के मामले में उनकी नाकामी सामने आने के बाद संघ सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल के लिए भी त्रिपाठी की लॉबिंग करना अब मुश्किल होगा। वैसे भी गोपाल की तूती अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय की नियुक्तियों में कम हो गई है।