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BHU विवाद: टूट सकता है VC गिरीश चंद्र का UGC चेयरमैन बनने का सपना, हरकत में बीजेपी आलाकमान

Tue, 26 Sep 2017 12:26 AM IST
संजय मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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BHU वीसी गिरीश चंद्र त्रिपाठी - फोटो : FILE PHOTO
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बीएचयू विवाद गहराने से वाइस चांसलर गिरीश चंद्र त्रिपाठी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सेवा विस्तार से लेकर यूजीसी चेयरमैन बनने के उनके सपनों पर ग्रहण लगने के आसार हैं। बीएचयू में लड़कियों पर शनिवार को हुए लाठी चार्ज के मामले को लेकर फजीहत झेलने के बाद अब बीजेपी आलाकमान ने भी मामले में अपनी सक्रियता बढ़ाई है। दिल्ली में हुई बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में भी बीएचयू का मुद्दा चर्चा में रहा। 
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बीएचयू की घटना को दुर्भाग्यपुर्ण बताया है। बताया जा रहा है कि बीजेपी आलाकमान के हरकत में आने के बाद ही प्रदेश की योगी सरकार ने स्थानीय पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने इस मामले में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बातचीत की है। 

मसला पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र से जुड़े होने की वजह से बीजेपी आलाकमान मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। इस बीच बीएचयू के ताजे विवाद में वाइस चांसलर गिरीश चंद्र त्रिपाठी पर फिलहाल किसी बड़े कार्रवाई के आसार नहीं हैं। चूंकि त्रिपाठी सीधे संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल की पसंद बताए जा रहे हैं। लेकिन भविष्य के लिए उनके लिए आगे के रास्ते अब बंद हो सकते हैं। 
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यूजीसी चेयरमैन की दौड में शामिल हैं त्रिपाठी का नाम 
सूत्र बताते हैं कि लड़कियों पर लाठी चलाने के मामले को लेकर बीएचयू वाइस चांसलर गिरीश चंद्र त्रिपाठी की मुश्किलें बढ़नी तय मानी जा रही हैं। संघ सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल का करीबी होने की वजह से उनपर हाल फिलहाल कोई बड़ी कार्रवाई न हो, मगर उनके सेवा विस्तार का मामला खटाई में पड़ सकता है।

बीएचयू वाइस चांसलर पद पर त्रिपाठी का कार्यकाल 25 नवंबर तक है। इस पद पर उनकी नियुक्ति 26 नवंबर 2014 को हुई थी। यही नहीं यूजीसी चेयरमैन बनने के उनके सपने को भी अब ग्रहण लग गया है। बताया जा रहा है कि यूजीसी चेयरमैन के लिए कुछ नामों की सूची बनी है उसमें त्रिपाठी का नाम भी शामिल है। मगर उनकी अक्षमता सामने जाहिर होने के बाद इस पद पर अब उनके पिछड़ने के आसार हैं।

यही नहीं उनकी नजर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय के वाइस चांसलर पद पर भी थी। लेकिन इस पद के लिए भी अब वे रेस से बाहर माने जा रहे हैं। सरकार के उच्च सूत्रों की मानें तो लड़कियों पर लाठी चलाने के मामले में उनकी नाकामी सामने आने के बाद संघ सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल के लिए भी त्रिपाठी की लॉबिंग करना अब मुश्किल होगा। वैसे भी गोपाल की तूती अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय की नियुक्तियों में कम हो गई है। 

 

इससे पहले भी विवादों में रहे हैं त्रिपाठी

गिरीश चंद्र त्रिपाठी - फोटो : FILE PHOTO
कृष्ण गोपाल के सहारे बीएचयू वाइस चांसलर के पद पर पहुंचने वाले गिरीश चंद्र त्रिपाठी पहले इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे। तमाम लोगों की कोशिशों को विफल करार करते हुए वे कृष्ण गोपाल की कृपा से बीएचयू के वीसी पद पर पहुंचे थे। गोपाल जब काशी में बतौर प्रांत प्रचारक संघ का कार्य देखते थे। तब से ही त्रिपाठी उनसे जुडे हुए हैं। 

गोपाल के अलावा वे पूर्व भाजपा अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी के भी करीबी बताए जाते हैं। त्रिपाठी को बीएचयू का वीसी बनाने में कृष्ण गोपाल के अलावा गिरधर मालवीय ने भी अहम भूमिका निभाई है। लेकिन बीएचयू वाइस चांसलर बनने के बाद त्रिपाठी अपनी भूमिका का निर्वाह ठीक ढंग से कर पाने में सफल नहीं रहे हैं। उनके कई कदमों पर अपनों के जरिए भी सवाल उठे हैं।
 
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बतौर बीएचयू वाइस चांसलर त्रिपाठी के अन्य विवादित कदम

गिरीश चंद्र त्रिपाठी - फोटो : FILE PHOTO
कृष्ण गोपाल के करीबी कहे जाने वाले त्रिपाठी की कार्यप्रणाली से नाराज होकर स्वयं संघ के छात्र संगठन अखिल भारतीय विधार्थी परिषद को उनके खिलाफ मोर्चा खोलने को मजबूर होना पडा था। चंद माह पहले एबीवीपी छात्रों ने बीएचयू वाइस चांसलर के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया था। तो कांग्रेस से बगावत कर बतौर निर्दलिय विधान परिषद का चुनाव लड़ने वाले डॉ. ओपी उपाध्याय को मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का चिकित्सा अधिक्षक बनाए जाने का मामला भी विवादित रहा। इसके अलावा संघ के दबाव में बीएचयू आईआईटी के छात्र संदीप पांडेय के निष्कासन का मामला भी बेहद सुर्खियों में रहा था। 

क्या है वर्तमान विवाद जिसने बढ़ाई हैं बीएचयू वाइस चांसलर की मुश्किलें
दरअसल अपनी सुरक्षा और बीएचयू कैंपस की कमियों को दूर करने का विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग कर रहीं छोत्राओं ने आंदोलन छेड़ रखा था। पीएम मोदी के बनारस दौरे की वजह से लड़कियों के इस आंदोलन पर देश-दुनिया की नजर पड़ी। आंदोलन कर रही लड़कियों से बातचीत के बजाय शनिवार रात को उनपर पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया। तब से मामले को लेकर देश की सियासत गर्म है।

हालांकि छात्राओं पर हुए लाठीचार्ज के मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ ने जांच के आदेश दे दिए हैं। स्थानीय पुलिस अफसरों पर भी शासन की गाज गिरी है। मामला बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यसमिति बैठक में उठने के बाद पार्टी ने घटना की न सिर्फ निंदा की है। बल्कि जांच का पूरा आश्वासन दिया है। मामले को लेकर बीएचयू वाइस चांसलर गिरीश त्रिपाठी के खिलाफ दिल्ली तक माहौल गर्म है। 

छात्राओं के आंदोलन और त्रिपाठी के हश्र के पीछे वजहें भी देख रहा है भगवा परिवार
बीएचयू में छात्राओं के आंदोलन और उनपर पुलिसिया लाठी बरपाने के हालातों पर भी भगवा परिवार मंथन कर रहा है। मामले को लेकर बीएचयू वाइस चांसलर गिरीश त्रिपाठी बेशक निशाने पर हैं। मगर उनके इस हश्र के पीछे के कारणों पर भी भगवा परिवार में गहन मंथन है। हालांकि जांच में सच सामने आएगा। मगर संघ सूत्रों की मानें तो वर्तमान हालातों के लिए संदीप पांडेय प्रकरण, विश्वविद्यालय में आम आदमी पार्टी का बढ़ता प्रभाव और जातिगत राजनीति सरीखे कारण दोषी हैं। 

बीएचयू आईआईटी से निष्कास्ति संदीप पांडेय यहां छात्रों के बीच ज्वाइंट एक्सन कमेटी नाम से समूह चला रहे हैं। जोकि भगवा विचार के खिलाफ छात्रों को लाम्बंद करने में जुटी हुई है। तो आम आदमी पार्टी का बढ़ता दबदबा भी भगवा संगठनों के लिए चिंता का विषय है। जबकि जातिगत गोलबंदी के लिए खुद बीएचयू वाइस चांसलर गिरीश त्रिपाठी की कार्यप्रणाली को जिम्मेदार माना जा रहा है।

एक जाति का विशेष वर्ग उनकी कार्यप्रणाली से खिलाफ होकर विश्वविद्यालय में उनके खिलाफ माहौल बनाने में जुटा हुआ है। बताया जा रहा है कि त्रिपाठी एक विशेष जाति वर्ग को नियुक्ति या अन्य मामलों में ज्यादा तरजीह देते थे। 
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