धारयति इति धर्म:। अर्थात् जो धारण करने योग्य है, वही धर्म है। कांग्रेस पार्टी के पूर्व महासचिव के अनुसार छान्दोग्योपनिषद और महाभारत के रचयिता वेदव्यास धर्म को लेकर यही कहते हैं। यही शास्त्र सम्मत है। इसलिए राहुल गांधी के हिन्दू होने पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। सूत्र का कहना है कि इंदिरा गांधी ने सदैव हिन्दू धर्म का पालन किया, रुद्राक्ष की माला पहनती रही और धर्माचार्यों का आदर करती रही। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के पिता पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी ने भी जीवन भर यही किया। राजीव गांधी को करीब से जानने वाले और 51 ब्रह्मणों के साथ उनका जनेऊ संस्कार कराने वाले रामजीदास (रसायनी बाबा) भी उन्हें हिन्दू बताते हैं। रासायनी बाबा के अनुसार, इस परंपरा में राहुल गांधी के हिन्दुत्व पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।
क्या कहते हैं रसायनी बाबा
रसायनी बाबा ने पुष्टि करते हुए कहा कि कश्मीर के ब्राह्मण दत्तात्रेय गोत्र से हैं। मोतीलाल नेहरू का गोत्र दत्तात्रेय था। जवाहर लाल का भी यही था। इंदिरा गांधी का विवाह पारसी फिरोज गांधी से हुआ था। धर्म पर गहरी पकड़ रखने वाले रसायनी बाबा का कहना है कि पारसी भी कभी हिन्दू थे। ये चारो वेदों को मानते हैं। ये भारत से ही ईरान की तरफ गए थे। इसमें कश्मीर के ब्राह्मण से लेकर बनारस और अन्य क्षेत्र के ब्राह्मण समेत अन्य जातियां थी।
वहां फारस की खाड़ी में बस गए तो फारसी कहलाए। अग्निपूजक हैं और यज्ञ की पद्धति भी इनसे आई। इनके प्रसिद्ध गुरु अरस्तू हुए थे और पारसियों का नाम इसके कारण बदल गया था। पारसियों में भी दत्तात्रेय का गोत्र देखने को मिला है। दूसरे शा स्त्र कहता है कि मनुष्य जिसे धारण कर सके, वहीं उसका धर्म है। इसी बिना पर तमाम धर्मों में धर्मांतरण के भी प्रवधान है। हिन्दू अपना धर्म बदलकर मुसलमान या ईसाई बन जाता है। इसलिए राहुल गांधी के धर्म पर कोई भी सवाल उठाना शा के विरुद्ध है।
राहुल गांधी दत्तात्रेय कौल ब्राह्मण
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का कहना है कि भाजपा के पाखंड के सामने कांग्रेस अध्यक्ष को ऐसा करना पड़ा। सूत्र का कहना है कि 70 के दशक से उनका जीवन कांग्रेस में गुजरा है। जहां तक उन्हें याद है, कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने और पार्टी ब्राह्मण, ठाकुर समेत अन्य सभी जाति के हिन्दू नेताओं ने कभी धर्म का दिखावा नहीं किया। बताते हैं भाजपा के नेताओं ने हिन्दू धर्म का पाखंड किया। संघ और आरएसएस ने हिन्दू, हिन्दुत्व के नाम पर देश की एकता, अखंडता, सौहार्द और मानवता को गहरी चोट पहुंचाई है। इसलिए राहुल गांधी को न केवल अपना धर्म, बल्कि जाति और गोत्र भी बताना पड़ा है। गौरतलब है कि राहुल गांधी ने पहले गुजरात चुनाव के दौरान खुद को शिवभक्त बताया। फिर जनेऊ धारी के रूप में आए और अब कौल दत्तात्रेय ब्राह्मण बताया था।
क्यों बताया दत्तात्रेय कौल ब्राह्मण ?
2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की बुरी तरह से पराजय हुई और महज 44 सीटें आई। इसकी समीक्षा के लिए कांग्रेस ने एके एंटनी की अध्यक्ष में समिति का गठन किया था। ईसाई एंटनी ने अपनी समीक्षा रिपोर्ट में इसका कारण कांग्रेस पार्टी का जरूरत से ज्यादा मुस्लिममय हो जाना बताया था। एंटनी समिति के अनुसार कांग्रेस पार्टी के चेहरे के कारण हिन्दू खुद को उपेक्षित महसूस करने लगे थे। ऐसे में गोधरा (गुजरात) नरसंहार के बाद राज्य में भड़की हिंसा और नरेंद्र मोदी की कट्टर हिन्दुत्व की बनी छवि ने भाजपा को चुनाव में काफी माइलेज दिया।
भाजपा और आरएसएस देश में चुनाव के दौरान ध्रुवीकरण कराने में सफल रहा और भाजपा ने लोकसभा में शानदार बहुमत हासिल कर लिया था। माना जा रहा है कि कांग्रेस ने भाजपा और आरएसएस की मंशा को भांपकर इस बार सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को रोकने के लिए यह कदम उठाया है। कभी ब्राह्मण, ठाकुर समेत अगड़ी, पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जाति, जनजाति के वर्चस्व वाली पार्टी सभी धर्मों, संप्रदायों का आदर करते हुए पुराने ढर्रे पर उतरना चाहती है। कांग्रेस के आईटी विभाग के रोहन गुप्ता कहते हैं कि कभी पूरे उत्तर भारत में अगड़ी जातियां कांग्रेस का जनाधार थी। पार्टी अध्यक्ष समय को भांपकर अपनी जाति, धर्म और अपना गोत्र बता रहे हैं तो इसमें हर्ज क्या है।