केंद्र सरकार ने विधि आयोग से समान नागरिक संहिता को लागू करने के मसले की समीक्षा करने के लिए कहा है। सरकार के इस कदम के साथ ही इसका विरोध भी शुरू हो गया है। मुस्लिम मजलिस और अन्य कई कार्यकर्ताओं ने सरकार के निर्णय की तीखी आलोचना की है।
वहीं, भाजपा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि संविधान में भी समान नागरिक संहिता का जिक्र है। समान नागरिक संहिता लागू कराने का मुद्दा हमेशा से ही भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष एजेंडे में शामिल रहा है। विधि विभाग ने विधि आयोग से कहा है कि वह समान नागरिक संहिता लागू करने के मुद्दे पर रिपोर्ट तैयार करे।
सरकार का यह फैसला इसलिए भी मायने रखता है क्योंकि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि तीन तलाक की संवैधानिक वैधता पर कोई भी फैसला लेने से पहले वह इस मुद्दे पर व्यापक बहस चाहता है।
मालूम हो कि तीन तलाक पर कई मुस्लिम महिलाओं और संगठनों की ओर से भी आवाज उठाई जा रही है कि मुस्लिम पुरुष इस व्यवस्था का मनमाने तरीके से इस्तेमाल कर अपनी पत्नियों को तलाक दे देते हैं। माना जा रहा है कि सरकार इस बारे में सुप्रीम कोर्ट को जानकारी देगी कि उसने समान नागरिक संहिता का मुद्दा विधि आयोग के पास भेजा है। इस मामले में सितंबर में सुनवाई होनी है।