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समान नागरिक संहिता मुद्दे की समीक्षा करे विधि आयोग: केंद्र

Sat, 02 Jul 2016 04:31 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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मोदी - फोटो : PTI
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केंद्र सरकार ने विधि आयोग से समान नागरिक संहिता को लागू करने के मसले की समीक्षा करने के लिए कहा है। सरकार के इस कदम के साथ ही इसका विरोध भी शुरू हो गया है। मुस्लिम मजलिस और अन्य कई कार्यकर्ताओं ने सरकार के निर्णय की तीखी आलोचना की है।
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वहीं, भाजपा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि संविधान में भी समान नागरिक संहिता का जिक्र है। समान नागरिक संहिता लागू कराने का मुद्दा हमेशा से ही भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष एजेंडे में शामिल रहा है। विधि विभाग ने विधि आयोग से कहा है कि वह समान नागरिक संहिता लागू करने के मुद्दे पर रिपोर्ट तैयार करे।

सरकार का यह फैसला इसलिए भी मायने रखता है क्योंकि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि तीन तलाक की संवैधानिक वैधता पर कोई भी फैसला लेने से पहले वह इस मुद्दे पर व्यापक बहस चाहता है।
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मालूम हो कि तीन तलाक पर कई मुस्लिम महिलाओं और संगठनों की ओर से भी आवाज उठाई जा रही है कि मुस्लिम पुरुष इस व्यवस्था का मनमाने तरीके से इस्तेमाल कर अपनी पत्नियों को तलाक दे देते हैं। माना जा रहा है कि सरकार इस बारे में सुप्रीम कोर्ट को जानकारी देगी कि उसने समान नागरिक संहिता का मुद्दा विधि आयोग के पास भेजा है। इस मामले में सितंबर में सुनवाई होनी है। 
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समान नागरिक संहिता वोट बैंक की राजनीति के चलते हो रहा विरोध

असदउद्दीन ओवैसी
भाजपा ने सरकार के कदम का समर्थन करते हुए कहा है कि संविधान में समान नागरिक संहिता का जिक्र है, लेकिन वोट बैंक की राजनीति के चलते इसका विरोध किया जा रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा कि इस मुद्दे पर खुली बहस होनी चाहिए।

हमने हमेशा इसकी वकालत की है। संविधान भी सभी नागरिकों के लिए समान नियमों-अधिकारों की बात कहता है। जो इसका विरोध कर रहे हैं, वे संविधान के प्रति असहिष्णु हैं। वहीं ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुसलमीन के नेता असदउद्दीन ओवैसी ने सरकार के फैसले की तीखी आलोचना की और इसे देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की दिशा में कदम करार दिया है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार नागरिक संहिता पर गंभीर है तो उसे अविभाजित हिंदू परिवारों को मिली टैक्स छूट को अगले संसद सत्र में वापस लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार रोजगार देने और विकास को रफ्तार देने में नाकाम रही है इसलिए जनता का ध्यान बंटाने के लिए ऐसे मुद्दों को उछाल रही है। 
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