कारगिल के युद्ध क्षेत्र को देखने के लिए लाखों की तादाद में पर्यटक पहुंच रहे हैं। पिछले 20 सालों में कारगिल, युद्ध क्षेत्र से पर्यटन केंद्र बन गया है। लाखों भारतीयों को पहली बार 1999 में युद्ध क्षेत्र, कारगिल की प्राचीन सुंदरता की झलक टीवी पर देखने को मिली थी।
एक फ्लैश टीवी पर दिखाया गया था जिसमें भारतीय सेना घुसपैठियों को पीछे धकेल रही है। टीवी पर दिखाए गए फ्लैश में लोगों ने न केवल सेना की जीत को देखा बल्कि कारगिल की सुंदरता के भी दर्शन किए। अब ये स्थान एक पर्यटन स्थल बन गया है।
युद्ध के एक साल बाद, 2000 में सिर्फ 300 से अधिक पर्यटक ही युद्धग्रस्त शहर में पहुंच पाए थे। लेकिन, 2018 में, पर्यटकों की संख्या लगभग एक लाख तक बढ़ गई। कारगिल हमेशा एक शांत शहर रहा है।
सिल्क रूट व्यापार नेटवर्क की वजह से ये शहर पर्यटकों को आकर्षित करता है। लेकिन इस शहर में आने वाले सभी लोग शहर से लगभग 60 किमी दूर कारगिल वॉर मेमोरियल, 'कॉल ऑफ ड्यूटी' को देखने आते हैं।
संघर्ष क्षेत्र और नियंत्रण रेखा के अलावा पर्यटक सुरू घाटी के पास माउंटेनियरिंग और ट्रेकिंग करने के लिए भी आते हैं। 2004 में यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या बहुत कम थी लेकिन 2017 में ये संख्या बढ़कर 64 हजार हो गई।
कारगिल विकास प्राधिकरण के अधिकारी शब्बीर हुसैन ने कहा कि कारगिल युद्ध से इस शहर को एक नई पहचान मिली। लोगों की युद्ध को लेकर जिज्ञासा को दूर करने के लिए यहां पर्यटन की शुरुआत की गई।