दिवाली के सीजन में दूध और खोवे से बनी मिठाइयां हमें ललचाती हैं। लेकिन दूध में डिटर्जेंट पॉवडर या यूरिया जैसी चीजों की मिलावट की खबरों ने लोगों को डरा दिया है। यही कारण है कि लोग अब दिवाली जैसे त्योहारों पर भी मिठाई खाने से डरने लगे हैं। लेकिन एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि देश में बिकने वाला 93 फीसदी दूध सुरक्षित है। दूध में डिटर्जेंट या यूरिया मिलाए जाने की घटनाएं कम हो गई हैं।
रिपोर्ट में यह चिंताजनक तथ्य सामने आया है कि दूध में 'एफ्लॉटॉक्सिन एम वन' नामक रसायन की मात्रा बढ़ती जा रही है जो लोगों को बहुत बीमार बना सकता है। एफ्लॉटॉक्सिन एम वन जानवरों को खिलाए जाने वाले चारे के माध्यम से दूध में पहुंच रहा है जिसके लिए हमारे देश के किसानों में जागरुकता बहुत कम है।
एफएसएसएआई की रिपोर्ट
एफएसएसएआई (FSSAI) ने शुक्रवार को 'नेशनल मिल्क सेफ्टी एंड क्वालिटी सर्वे 2018' रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट के लिए इकट्ठा किए गए 6432 सैंपलों में से केवल 12 को असुरक्षित पाया गया है। दूध के असुरक्षित सैंपलों में छः में हाइड्रोजन परऑक्साइड, तीन में डिटर्जेंट्स और दो में यूरिया पाया गया है। असुरक्षित सैंपलों में सबसे ज्यादा नौ तेलंगाना में सामने आए जबकि दो सैंपल मध्यप्रदेश और एक केरल से मिले थे।
कुल 6432 सैंपलों में से 368 (कुल का 5.7 फीसदी) में एफ्लॉटॉक्सिन एम वन पाया गया है। तमिलनाडु के सबसे ज्यादा दूध के सैंपलों में एफ्लॉटॉक्सिन पाय़ा गया है। तमिलनाडु के बाद दिल्ली और केरल के सैंपलों में सबसे ज्यादा एफ्लॉटॉक्सिन एम वन पाया गया है। वहीं 1.2 फीसदी सैंपलों में एंटीबायोटिक्स पाया गया है।
क्वालिटी खराब
दूध में हानिकारक चीजों को मिलाकर बेचने की घटनाओं में कमी आई है, लेकिन दूध की गुणवत्ता कई कारणों से खराब हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में बिकने वाले दूध का 41 फीसदी सही क्वालिटी का नहीं है। दूध की गुणवत्ता में आई यह कमी दूध में पानी, फैट या चीनी मिलाने की वजह से आई है। सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि दूध में फैट जैसी चीजें बाजार की बड़ी कंपनियों के द्वारा मिलाए जा रहे हैं। यह दूध दिल के मरीजों और मोटे लोगों के लिए नुकसानदायक होता है।