भारत से गिफ्ट में मिले चार एमआई-25 हेलीकॉप्टरों पर अफगानिस्तान सेना ने धन्यवाद दिया है। लेकिन, उसे ऐसे ही और हेलीकॉप्टर की जरूरत है। अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान में कमांडर जनरल जॉन निकलसन ने कहा कि अफगानिस्तान ने ऐसे ही और हेलीकॉप्टर मांगे हैं। उन्हें इसकी तत्काल जरूरत है। जब उन्हें ये हेलिकॉप्टर मिल जाएंगे, वह तुरंत ही लड़ाई में शामिल हो जाएंगे।
नई दिल्ली पहुंचे जनरल निकल्सन ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव एस जयशंकर और सुरक्षा सलाहकार मोहन कुमार से मुलाकात की। सभी ने अफगानिस्तान में भारत-अमेरिका के सामुहिक सहयोग पर बात की। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वह अफगानिस्तान वायु सेना में रसियन मेड एयरक्राफ्ट के लिए भारत की तरफ आशाभरी नजरों से देख रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि वह अफगानिस्तान वायु सेना को सुरक्षा के महत्वपूर्ण घटक के रूप में बनाने की ओर देख रहे हैं। यह कई एयर फ्रेम में बनेगा। वहां कुछ हथियार पुराने रसियन मॉडल के हैं, जिन्हें नई टेक्नोलॉजी से जोड़ा गया है। उन्हें और एयरक्राफ्ट की जरूरत है और वे देख रहे हैं कि कैसे उन जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।
पाकिस्तान ने जाहिर की चिंता
हेलीकॉप्टर फाइल फोटो
रूस के खिलाफ प्रतिबंधों का मतलब है कि ज्यादातर डोनर रसिया से एयरक्राफ्ट लेने के लिए अपने पैसे का प्रयोग नहीं कर सकते हैं। चूंकि, भारत में मास्को के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है, इसलिए वह भारत में आए हैं।
हालांकि, पाकिस्तान ने इस मुद्दे को उठाते हुए अफगानिस्तान में भारतीय सुरक्षा सहायता पर अपनी चिंताएं जाहिर की है। उन्होंने कहा कि हमें अफगानिस्तान में लश्कर-ऐ-तैयबा की मौजूदगी के निशान मिले हैं। वह लश्कर पर दबाव बनाना चाहते हैं।
लश्कर की गतिविधियों पर रखी जा रही नजर
हेलीकॉप्टर फाइल फोटो
यद्यपि लश्कर का जन्म अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में हुआ था। यह अनिवार्य रूप से भारत में आईएसआई के ऑपरेशन के लिए सहायक हो सकता है। लश्कर अफगानिस्तान में खुलेआम अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है, इसलिए इसमें पाकिस्तान की सहभागिता देखी जा सकती है।