पुनर्विचार याचिका की अहम बातें
- विवादित स्थल को हिंदुओं को देना एक मायने में बाबरी मस्जिद को तोड़ने का ‘इनाम’ है
- वर्ष 1934, 1949 और 1992 में जिन अपराधों को अंजाम दिया गया, उच्चतम न्यायालय ने उसका इनाम हिंदुओं को दिया, जबकि न्यायालय ने इन कृत्यों को गैरकानूनी बताया है
- गैरकानूनी कृत्य के कारण किसी भी व्यक्ति को फायदे से महरूम नहीं किया जा सकता
- पूर्ण न्याय के नाम पर उच्चतम न्यायालय ने किया अनुच्छेद-142 का गलत इस्तेमाल, अदालत को बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण का निर्देश देना चाहिए था
- इस सच्चाई को नकार दिया गया कि विवादित स्थल हमेशा से मुस्लिमों के कब्जे में था
- बाबरी मस्जिद को वक्फ संपत्ति न मानना गलत
- मुस्लिम पक्ष द्वारा पेश किए गए तत्कालीन दस्तावेज के बजाय हिंदू पक्ष द्वारा गवाहों के मौखिक बयान को प्राथमिकता देना गलत
राजीव धवन ने भरी अदालत में फाड़ा था नक्शा
वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान भरी अदालत में एक नक्शे को फाड़ दिया था। यह नक्शा अखिल भारतीय हिन्दू महासभा द्वारा अदालत में पेश किया गया था। महासभा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने संविधान पीठ के समक्ष कहा कि अब तक किसी भी पक्षकार ने यह नहीं बताया है कि भगवान राम का जन्म किस जगह पर हुआ था।