मिलावटखोरों के लिए बुरी खबर है। यदि विधि आयोग की सिफारिशों को मान लिया गया तो मिलावटी खाने से मौत होने पर दोषियों को ताउम्र जेल में बितानी होगी। इसके अलावा उन्हें 10 लाख रुपये का जुर्माना भी भरना पड़ेगा।
अपनी रिपोर्ट में विधि आयोग ने आईपीसी की धाराओं 272 और 273 में संशोधन का प्रस्ताव किया है। अपराध कानून (संशोधन) बिल 2017 में मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने पर कार्रवाई का प्रावधान है। आयोग ने सिफारिश की है कि इस मामले में मौजूदा छह महीने की जेल की सजा की बजाए और कड़े दंड का प्रावधान किया जाए।
आयोग ने मिलावटी खाद्य पदार्थ खाने से होने वाली बीमारी के अलग-अलग सजा की सिफारिश की है। आईपीसी की धारा 272 में जहां मिलावटी सामान बनाने वालों से निपटने का प्रावधान है, वहीं 273 में इसकी बिक्री पर रोक का प्रावधान है। इसके उल्लंघन पर बेहद कड़ी सजा की सिफारिश की गई है।
प्रस्तावित संशोधन में मिलावटी खाद्य पदार्थ से सामान्य रूप से बीमार होने पर अपराधी को एक साल की कैद और 3 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है। गंभीर रूप से बीमार होने पर 6 साल की सजा और 5 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। मिलावटी पदार्थ खाने से किसी की मौत होने पर प्रस्तावित कानून में ताउम्र जेल और 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आयोग से आईपीसी की उक्त दोनों धाराओं में सुधार की सिफारिश करने को कहा था।