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रिपोर्ट: 5 राज्यों के चुनाव में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 191 उम्मीदवार, पार्टियों ने नहीं बताई टिकट देने की वजह

Fri, 11 Sep 2026 08:07 PM IST
देवेश त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एडीआर ने पांच राज्यों और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दलों की ओर से आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों के चयन को लेकर जारी जानकारी का विश्लेषण किया। संगठन के मुताबिक, 1,405 उम्मीदवारों ने आपराधिक मामले घोषित किए थे, लेकिन 191 के लिए टिकट देने का कारण उपलब्ध नहीं था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई दलों ने अलग-अलग उम्मीदवारों के लिए समान या दोहराए गए कारणों का इस्तेमाल किया।
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कई के टिकट का कारण नहीं बताया - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों को टिकट देने के कारण बताने में राजनीतिक दलों की ओर से नियमों का पालन नहीं किया गया। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने 51 राजनीतिक दलों के 3,539 उम्मीदवारों के हलफनामों का विश्लेषण किया। इनमें 1,405 उम्मीदवारों ने अपने हलफनामे में आपराधिक मामले घोषित किए थे। इनमें से 191 उम्मीदवारों के लिए जरूरी कारण सार्वजनिक नहीं किए गए।
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एडीआर के मुताबिक, राजनीतिक दलों ने 1,214 उम्मीदवारों के लिए फॉर्मेट सी-7 में जरूरी जानकारी जारी की थी। वहीं 191 यानी 14 प्रतिशत उम्मीदवारों के लिए यह जानकारी उपलब्ध नहीं थी।

किन राज्यों में कितने उम्मीदवारों की नहीं मिली जानकारी?
असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के साथ केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के चुनाव में कुल 8,848 उम्मीदवार मैदान में थे। एडीआर ने इन चुनावों में 51 राजनीतिक दलों की ओर से उतारे गए 3,539 उम्मीदवारों के हलफनामों का विश्लेषण किया।
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तमिलनाडु में सबसे ज्यादा 72 उम्मीदवार ऐसे थे, जिनके लिए सी-7 खुलासा उपलब्ध नहीं था। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 55, केरल में 27, पुडुचेरी में 12 और असम में 10 उम्मीदवारों के लिए यह जानकारी उपलब्ध नहीं थी।

क्या है फॉर्मेट सी-7?
एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, सी-7 खुलासे का मकसद मतदाताओं को यह बताना है कि किसी उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने के बावजूद पार्टी ने उसे टिकट क्यों दिया। साथ ही यह भी बताना होता है कि आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं रखने वाले किसी दूसरे उम्मीदवार को टिकट क्यों नहीं दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में राजनीतिक दलों को निर्देश दिया था कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के चयन के 72 घंटे के भीतर उन्हें टिकट देने के कारण सार्वजनिक किए जाएं। ये कारण उम्मीदवार की योग्यता, उपलब्धियों और मेरिट पर आधारित होने चाहिए, केवल उसकी 'जितने की क्षमता' यानी 'विनेबिलिटी' पर नहीं। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों को अपनी वेबसाइट, सोशल मीडिया खातों और समाचार पत्रों में यह जानकारी प्रकाशित करने का निर्देश दिया था।

राज्यवार क्या है आंकड़ा?
  • तमिलनाडु में एडीआर ने 1,162 उम्मीदवारों का विश्लेषण किया। इनमें 473 उम्मीदवारों ने आपराधिक मामले घोषित किए थे। इनमें 72 उम्मीदवारों के लिए जरूरी खुलासा उपलब्ध नहीं था।
  • पश्चिम बंगाल में 1,516 उम्मीदवारों में से 559 ने आपराधिक मामले घोषित किए थे। इनमें 55 उम्मीदवारों के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं थी।
  • केरल में विश्लेषण किए गए 431 उम्मीदवारों में 268 ने आपराधिक मामले घोषित किए थे। इनमें 27 उम्मीदवारों के लिए सी-7 खुलासा उपलब्ध नहीं था।
  • असम में 318 उम्मीदवारों में से 66 ने आपराधिक मामले घोषित किए थे। इनमें 10 उम्मीदवारों के लिए जरूरी सी-7 खुलासा उपलब्ध नहीं था।
  • पुडुचेरी में विश्लेषण किए गए 112 उम्मीदवारों में से 39 यानी 35 प्रतिशत ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए थे। इनमें 12 यानी 31 प्रतिशत उम्मीदवारों के लिए टिकट देने के कारण सार्वजनिक किए गए थे।

एक जैसे कारण देने का भी दावा
एडीआर ने पाया कि आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों को टिकट देने के लिए राजनीतिक दलों की ओर से दिए गए कारण कई मामलों में एक जैसे या दोहराए गए थे। कई बार कारण उम्मीदवार की व्यक्तिगत स्थिति के मुताबिक अलग-अलग नहीं थे। खुलासों में आमतौर पर उम्मीदवार की सार्वजनिक छवि, सामाजिक कार्य, अनुभव, लोकप्रियता, योग्यता और सीट के लिए उपयुक्तता जैसे कारण बताए गए। हालांकि, कई मामलों में कई उम्मीदवारों के लिए एक ही शब्दावली का इस्तेमाल किया गया।

तमिलनाडु में एडीआर ने पाया कि भाजपा, अन्नाद्रमुक, द्रमुक और तमिलगा वेत्री कझगम समेत कुछ दलों ने आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों के लिए अपने खुलासों में शब्दश: एक जैसे कारण दिए। रिपोर्ट में ऐसे मामले भी सामने आए, जहां आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं रखने वाले उम्मीदवारों को टिकट नहीं देने के कारण बताने के लिए भी एक जैसी भाषा का इस्तेमाल किया गया।

किस पार्टी ने बताए एक जैसे कारण?
असम में एआईयूडीएफ ने अपने सभी विश्लेषित उम्मीदवारों के लिए यह बताने में एक ही कारण इस्तेमाल किया कि आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं रखने वाले दूसरे उम्मीदवारों को क्यों नहीं चुना गया। भाजपा ने भी इस हिस्से में अपने बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के लिए एक जैसी भाषा का इस्तेमाल किया। गण सुरक्षा पार्टी ने विश्लेषण किए गए अपने सभी उम्मीदवारों के लिए दोनों हिस्सों में एक ही शब्दावली का इस्तेमाल किया।

एडीआर ने कहा कि उसके निष्कर्ष चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों की वेबसाइटों और सोशल मीडिया खातों पर उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि संभव है कि राजनीतिक दलों ने कुछ खुलासे अन्य माध्यमों से प्रकाशित किए हों, जो एडीआर के रिकॉर्ड में शामिल नहीं हो सके।
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