रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि तकनीक ने पारंपरिक युद्ध को अपरंपरागत युद्ध में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव के साथ आगे बढ़ने के लिए उन अपरंपरागत तरीकों को अपनाना ही प्रगति का एकमात्र तरीका है, जिनके बारे में अभी तक दुनिया को पता नहीं है।
डीआरडीओ भवन में आयोजित एक कार्यशाला में अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि आज की प्रौद्योगिकी ने पारंपरिक युद्ध को अपरंपरागत युद्ध में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन, साइबर युद्ध, जैविक हथियार और अंतरिक्ष रक्षा जैसे आयाम जुड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा में अनुसंधान और विकास निश्चित रूप से रक्षा क्षेत्र को मजबूत करेगा।
सिंह ने निजी क्षेत्र को इस दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया, ताकि वह भागीदारी के स्तर से नेतृत्व की स्थिति में आ सके। उन्होंने कहा कि यही समय है कि निजी क्षेत्र नेतृत्व करे, क्योंकि उनके पास तेजी से बदलाव को स्वीकर करने और नवाचार पैदा करने की क्षमता है। रक्षा मंत्री ने यह भी माना कि अपरंपरागत युद्ध के लिए उन विचारों को अपनाना जरूरी है, जिनके बारे में दुनिया नहीं जानती है। उन्होंने कहा, यह एक कठिन काम है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार इस प्रयास में युवाओं, वैज्ञानिकों, उद्योगपतियों और एमएसएमई सभी को जरूरी समर्थन प्रदान करती रहेगी।
उन्होंने रक्षा क्षेत्र को अधिक नवोन्मेषी और प्रौद्योगिकी आधारित बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान उन्होंने 'डेअर टू ड्रीम 5.0' प्रतियोगिता का भी शुभारंभ किया, जिसका मकसद भावी पीढ़ी के नवप्रवर्तकों और स्टार्ट-अप्स को रक्षा अनुप्रयोगों के लिए परिवर्तनकारी विचारों के साथ आगे आने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने डेअर टू ड्रीम 4.0 के विजेताओं को भी सम्मानित किया।
उन्होंने आगे कहा, हमारे बहादुर सैनिकों की तरह वैज्ञानिक, कारोबारी, अकादमिक, स्टार्ट-अप्स और एमएसएमई भी देश के यौद्धा हैं, जो हर काम को पूरा करने के लिए तत्पर हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों, स्टार्ट-अप्स और युवा उद्यमियों से आग्रह किया कि वे नए विचारों के साथ आगे आएं और चुनौतियों को स्वीकार करने की आदत डालें। रक्षा मंत्री ने निजी क्षेत्र में हो रहे तकनीकी बदलावों के साथ तालमेल बनाने का भी आह्वान किया।
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