जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत नजरबंदी करने के निर्णय को सही ठहराया है। प्रशासन ने कहा है कि उमर अब्दुल्ला अब भी लोक व्यवस्था के लिए खतरा बने हुए हैं। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ ने उमर की नजरबंदी को चुनौती देने वाली उनकी बहन सारा अब्दुल्ला पायलट की याचिका पर पांच मार्च को सुनवाई की तारीख तय कर दी।
जस्टिस अरुण मिश्रा ने सुनवाई के दौरान कहा, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा ने भी याचिका दी है, जिसमें उसने अपनी मां महबूबा की पीएसए के तहत नजरबंदी को चुनौती दी है। उन्होंने सलाह दी कि दोनों ही मामलों को साथ ही सुना जाना चाहिए। इल्तिजा की याचिका पर 18 मार्च को, जबकि सारा की याचिका पर पांच मार्च को सुनवाई होगी।
राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की पत्नी सारा अब्दुल्ला पायलट ने शीर्ष अदालत में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर अपने भाई उमर की जन सुरक्षा कानून के तहत नजरबंदी के पांच फरवरी के प्रशासन के आदेश को चुनौती दे रखी है। सारा ने याचिका में कहा है कि नजरबंदी का आदेश गैरकानूनी हैं और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में उनके भाई से किसी प्रकार का खतरा होने का सवाल ही नहीं है। इसमें कहा गया है कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से जानबूझकर राजनीतिक नेताओं को खामोश कर दिया गया है।