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देश की राजधानी का प्रशासन अकेले दिल्ली सरकार पर नहीं छोड़ सकते : केंद्र

Thu, 20 Sep 2018 05:26 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट
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दिल्ली देश की राजधानी होने के कारण विशेष दर्जा रखती है। इस कारण यहां का प्रशासन अकेले दिल्ली सरकार के हवाले नहीं कर सकते हैं। ये बात केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी। 

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केंद्र सरकार के वकील ने जस्टिस एके सीकरी और अशोक भूषण की दो सदस्यीय पीठ से कहा कि शीर्ष अदालत की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ये स्पष्ट कर चुकी है कि दिल्ली को राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि मूल मुद्दा यह है कि क्या राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (जीएनएसटीडी) की सरकार के पास ‘सेवाओं’ के संबंध में विधायी और कार्यकारी शक्तियां हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।

बता दें कि संविधान पीठ ने 4 जुलाई को राष्ट्रीय राजधानी के प्रबंधन के लिए व्यापक मानदंड निर्धारित करते हुए उस झगड़े को निपटाने का प्रयास किया था, जो 2014 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद से ही उसके और केंद्र सरकार के बीच चला आ रहा था। केंद्र के वकील ने कहा, संविधान पीठ ने कहा था कि एक राज्य और एक केंद्र शासित क्षेत्र आपस में समान नहीं होते। 
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संविधान पीठ ने कहा था कि जीएनएसटीडी के पास तीन मुद्दों सार्वजनिक आदेश, पुलिस और भूमि को छोड़कर अन्य शक्तियां हैं। राष्ट्रीय राजधानी होने के कारण दिल्ली में बहुत सारे अहम संस्थान जैसे संसद, सुप्रीम कोर्ट, विदेशी दूतावास आदि मौजूद हैं। ऐसे में दिल्ली का प्रशासन किसी राज्य या केंद्र शासित सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है। इससे पहले दिल्ली सरकार के वकील ने पीठ को बताया था कि राज्य सरकार के पास जांच आयोग बनाने की कार्यकारी शक्तियां मौजूद हैं।

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क्या है मामला

आप सरकार ने 18 जुलाई को शीर्ष अदालत से कहा था कि उसकी कार्य प्रणाली पूरी तरह बेकार हो चुकी है और वह संविधान पीठ की तरफ से राष्ट्रीय राजधानी के प्रशासन को लेकर निर्णय लिए जाने के बावजूद अपने अधिकारियों का ट्रांसफर और पोस्टिंग नहीं कर पा रही है। संविधान पीठ ने 4 जुलाई को अपने ऐतिहासिक फैसले में दिल्ली सरकार की तरफ से अपनी प्रशासनिक व विधायी शक्तियों का उपयोग कर विभिन्न अधिसूचनाएं जारी करने का मुद्दे पर अलग से एक छोटी पीठ सुनवाई करेगी।


 
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