एनजीटी ने यमुना को साफ करने की दिशा में प्रशासन की ओर से किए जा रहे प्रयासों पर असंतोष जताया है। एनजीटी की एक बेंच ने आगरा में सीवेज प्रबंधन में भारी लापरवाही की ओर इंगित किया है। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस सुधीर अग्रवाल की बेंच ने 11अप्रैल, 2023 को प्रदूषण प्रबंधन पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उपचारित सीवेज का उपयोग करने के बजाय यमुना में गंदा पानी बहाया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की ओर से 24 फरवरी 2023 को सौंपी गई रिपोर्ट में यमुना नदी में प्रतिदिन 131 मिलियन लीटर (एमएलडी) अनुपचारित सीवेज का निर्वहन और आवश्यक उपचारात्मक कार्रवाई करने में अधिकारियों की विफलता को स्वीकार किया है।
एनजीटी ने कहा कि यूपीपीसीबी की ओर से प्रस्तुत की गई रिपोर्ट से स्पष्ट है कि अफसरों को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तैयार करने में कोई जल्दबाजी नहीं है। प्रतीत होता है कि वर्ष 2014 के बाद कोई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तैयार ही नहीं किया गया।
एक माह में बैठक
एनजीटी ने यूपी के मुख्य सचिव को अधिकारियों के साथ मिलकर उचित उपचारात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। बेंच ने कहा कि आगरा में सभी मौजूदा 9 एसटीपी का उपयोग होता है अथवा नहीं और मानकों का पालन किया जाता है या नहीं, इसका आकलन करने के लिए एक माह के अंदर अधिकारियों की बैठक बुलाएं। साथ ही चार माह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करें। सीपीसबी को क्लोरीनीकरण, उर्वरक सिंचाई, एसटीपी की कार्य प्रणाली और आगरा में उपचारात्मक परियोजनाओं से सम्बंधित रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कहा गया है।A