राहुल गांधी ने कहा था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आदिवासी समुदाय के लिए नया शब्द वनवासी लाए हैं। इस शब्द के पीछे उनकी दूसरी सोच है। वे आदिवासियों को देश का पहला मालिक नहीं मानते। वनवासी का मतलब है कि आप सिर्फ जंगल में रहते हो
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान के बाद आदिवासी व वनवासी शब्द को लेकर बहस छिड़ गई है। इस बीच राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) के अध्यक्ष हर्ष चौहान ने कहा है कि संविधान में आदिवासी लोगों के लिए अनुसूचित जनजाति शब्द का इस्तेमाल किया गया है। ऐसे में इस पर बहस व्यर्थ का काम है।
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उन्होंने कहा, यह एक राजनीतिक बहस है और इस बहस का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा, संविधान में न तो 'आदिवासी' और न ही 'वनवासी' शब्द है। संविधान सभा ने सावधानीपूर्वक संविधान में अनुसूचित जनजाति शब्द का इस्तेमाल किया है।
रामायण काल से हो रहा वनवासी शब्द का इस्तेमाल
हालांकि, एनसीएसटी अध्यक्ष ने कहा कि आदिवासी समुदाय के लिए पहले से वनवासी शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा, अंग्रेजों ने स्वदेशी समुदायों को परिभाषित करने के लिए 'आदिवासी' शब्द का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था। इसके अलावा रामायण काल से पहले भी वनवासी शब्द उपयोग में है।
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क्या कहा था राहुल गांधी ने?
दरअसल, भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने कहा था कि आदिवासी शब्द के पीछे हमारी यह सोच है कि देश के पहले मालिक आदिवासी है। उनका जमीन, जंगल, जल पर हक होना चाहिए, लेकिन जंगल से बाहर भी अधिकार मिलने चाहिए, लेकिन भाजपा की सरकारें पब्लिक सेक्टरों को उद्योगपतियों के हवाले कर सीधे आदिवासियों को चोट पहुंचाती है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आदिवासी समुदाय के लिए नया शब्द वनवासी लाए हैं। इस शब्द के पीछे उनकी दूसरी सोच है। वे आदिवासियों को देश का पहला मालिक नहीं मानते। वनवासी का मतलब है कि आप सिर्फ जंगल में रहते हो, वन के बाहर उनको कोई अधिकार नहीं मिलना चाहिए। भाजपा की सरकारें जंगल को उद्योगपतियों को दे रही है। देश से जंगल खत्म हो रहे हैं।