शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने शनिवार को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को उनके पद से हटाने की मांग की है। आदित्य ठाकरे का कहना है कि मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) की तरफ से मुंबई की दो बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया को रद्द करना एक बड़ा घोटाला है और इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए।
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एमएमआरडीए ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा?
शुक्रवार को एमएमआरडीए ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह दो महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं के टेंडर रद्द कर रहा है। ये दोनों प्रोजेक्ट हैं।
- मुंबई एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट – करीब 6,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला 9.8 किलोमीटर का पुल जो वसई क्रीक के ऊपर बनेगा।
- रोड टनल प्रोजेक्ट – 8,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 5 किलोमीटर लंबी दोहरी सुरंग जो ठाणे की घोड़बंदर रोड पर गाईमुख से फाउंटेन होटल जंक्शन तक जाएगी।
एमएमआरडीए ने कहा कि वह यह कदम जनहित में उठा रहा है ताकि लोगों का विश्वास बना रहे और करदाताओं के पैसों का सही उपयोग हो। उसने यह भी कहा कि वह परियोजना की अनुमानित लागत में लगभग 3,000 करोड़ रुपये की कटौती करने पर विचार कर रहा है।
आदित्य ठाकरे ने क्या आरोप लगाए?
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठाकरे ने कहा, 'सरकार क्यों पीछे हटी? कोई ठेकेदार सरकार के खिलाफ एक टेंडर के लिए नहीं जाता। ये पूरा मामला एक घोटाला है। टेंडर रद्द होने का मतलब यह नहीं कि सब कुछ साफ है। एमएमआरडीए पर तलवार लटकी थी इसलिए उन्होंने टेंडर रद्द किया।' आदित्य ठाकरे ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को इस मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) या आयकर विभाग (आईटी) से करानी चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट की भी फटकार
यह पूरा मामला उस समय सुप्रीम कोर्ट के सामने आया जब बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टुब्रो ने एमएमआरडीए की तरफ से उसे टेंडर प्रक्रिया से बाहर करने के फैसले को चुनौती दी। कोर्ट ने एमएमआरडीए को इस मामले में लापरवाही के लिए फटकार भी लगाई।
पिछले साल से उठ रहे थे सवाल
आदित्य ठाकरे ने कहा कि जब यह टेंडर पहली बार निकाला गया था (13 सितंबर 2024 को), तो ठेकेदारों को केवल 20 दिन का समय दिया गया था (बोली जमा करने की आखिरी तारीख 3 अक्तूबर 2024 थी)। उन्होंने कहा कि इतनी जल्दी की डेडलाइन सिर्फ इमरजेंसी कामों में दी जाती है, इतने बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए नहीं। उनके विरोध के बाद ही यह डेडलाइन 60 दिन तक बढ़ाई गई।
विदेशी बैंक गारंटी और 'मनपसंद ठेकेदार'
आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि एक विदेशी वित्तीय संस्था, जो कैरेबियन के सेंट लुइस देश से जुड़ी है, उससे बैंक गारंटी ली गई थी। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने इसपर सवाल उठाए, तभी जाकर एमएमआरडीए ने टेंडर प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया। आदित्य ठाकरे का कहना है कि टेंडर की शर्तें कुछ 'मनपसंद ठेकेदारों' को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई थीं।