फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भीमा कोरेगांव मामला एनआईए को सौंपने पर सत्र न्यायालय ने फैसला 14 फरवरी तक सुरक्षित रखा

Fri, 07 Feb 2020 12:19 PM IST
देव कश्यप एएनआई, पुणे
विज्ञापन
फाइल फोटो
विज्ञापन
पुणे सत्र न्यायालय ने भीमा-कोरेगांव मामले को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को हस्तांतरित करने के मामले पर 14 फरवरी तक आदेश सुरक्षित रख लिया है। अभियोजन पक्ष (महाराष्ट्र राज्य) ने एनआईए द्वारा  मामले की हस्तांतरण की मांग के आवेदन का विरोध किया है।
विज्ञापन


इससे पहले केंद्र सरकार ने भीमा कोरेगांव मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी थी। जिसके बाद एनआईए ने पुणे सेशंस अदालत में सभी रिकॉर्ड्स और कार्यवाहियों को मुंबई की एक विशेष एनआईए अदालत को हस्तांतरित करने की मांग की थी। 

भीमा कोरेगांव एलगार परिषद हिंसा से संबंधित जांच की जिम्मेदारी एनआईए को सौंपे जाने के बाद शिवसेना ने भी भाजपा पर निशाना साधा था। शिवसेना ने केंद्र सरकार पर गैर भाजपा शासित राज्यों में हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए कहा था कि भूखे भेड़िए की तरह एनआईए को महाराष्ट्र में भेजा, यह ठीक नहीं है। इस संबंध में राज्य के मुख्यमंत्री व गृहमंत्री से चर्चा कर रास्ता निकाला जा सकता था।
विज्ञापन


शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में ‘केंद्र का हस्तक्षेप ये उचित नहीं’ शीर्षक के तहत संपादकीय लिखा था कि भारत राज्यों का एक संघ है। इसलिए हर राज्यों के अपने अधिकार और स्वाभिमान हैं। केंद्र की ओर से जबरन उठाए गए इस कदम से अस्थिरता आ रही है। आरोप लगाया है कि एलगार परिषद मामले की जांच एनआईए को सौंप कर केंद्र प्रतिशोध की राजनीति कर रही है। 

जबकि पुणे पुलिस इस मामले में संदिग्ध माओवादी संबंधों की जांच कर रही थी। शिवसेना ने सवाल किया कि इस तरह की बहुत सी घटनाएं भाजपा शासित राज्यों में हो रही हैं, लेकिन वहां केंद्र क्यों दखल नहीं देता। जिस प्रकार से केंद्र ने भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की जांच की जिम्मेदारी एनआईए को सौंपी है क्या वह नहीं चाहती कि सच सामने आए।

संपादकीय में लिखा कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने भीमा कोरेगांव दंगा एक राजनीतिक एवं राष्ट्रीय षड्यंत्र बताया था। इसी गुप्त शक्ति के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की जान को खतरा पैदा हो गया था। सबूत के तौर पर बेनामी पत्र और ईमेल आदि मिले हैं, लेकिन देश की सत्ता उलटने की क्या साजिश थी। लोग इसे अब तक समझ नहीं पाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें