क्या केंद्र सरकार का कोविड-19 संक्रमण से निबटने का पहला चरण पटरी से उतर चुका है? आईसीएमआर के सलाहकारों में शामिल आईआईटी दिल्ली के सूत्र कुछ इसी तरह का इशारा कर रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि भारत सरकार, आईसीएमआर दोनों ने महामारी के दबाव और हड़बड़ी में रैपिड टेस्ट किट से जांच का निर्णय ले लिया था। इसके लिए चीन समेत कुछ देशों से बड़े पैमाने पर रैपिड टेस्ट किट लेने की पहल हुई थी, जबकि आईसीएमआर के वैज्ञानिक जानते थे कि इस तरह की रैपिड टेस्ट किट के नतीजे विश्वसनीय नहीं होते।
वायरस की जांच में सबसे कारगर उपाय आरटी-पीसीआर तकनीक पर आधारित मेसेंजर आरएनए (राइबो न्यूक्लिक एसिड) की जांच है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसी की मान्यता दी है। सूत्र का कहना है कि आरटी-पीसीआर तकनीक से जांच का ही नतीजा 100 फीसदी विश्वसनीय होता है।
केंद्र सरकार के रणनीतिकारों में प्रमुख डा. विनोद कुमार पॉल ने भी 15 अप्रैल के बाद देश का नक्शा बदलने की बात कही थी, लेकिन अब उनका भी लड़ाई लंबी चलने का अनुमान है। एम्स के निदेशक डा. रणदीप गुलेरिया ने जून में कोविड-19 के मामले शीर्ष होने पर आशंका व्यक्त की है।
जबकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि यह महीना जुलाई-अगस्त 2020 का हो सकता है। मंत्रालय सूत्रों का भी मानना है कि कोविड-19 की जांच में तेजी जून महीने में ही आ सकेगी।
लॉकडाउन से लगातार छूट बढ़ाने के सवाल पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कब तक सब कुछ बंद रखा जा सकता है। एक न एक दिन तो औद्योगिक गतिविधियों से लेकर सब कुछ खोलना ही है। लॉकडाउन कोविड-19 से निबटने की तैयारियों की लिए था। यह पूछे जाने पर कि क्या तैयारी हो गई? सूत्र का कहना है कि चल रही है।
प्रो. वी रामगोपाल राव का कहना है कि आईआईटी दिल्ली तकनीकी मामले में अपना योगदान कर रही है। हमने फ्लोरसेंट डाई आधारित आरटी-पीसीआर कोविड-19 टेस्ट किट डेवलप की है। इसे प्रो. विवेक पेरुमल और अन्य की टीम ने तैयार किया है। 7-8 बड़ी फार्मा टेस्ट किट कंपनियों को इसे बनाने के लिए आईआईटी दिल्ली ने तकनीकी हस्तांतरण कर दी है।
किट के बारे में बताते हुए प्रो. विवेक पेरुमल का कहना है कि यह दूसरे तरह के रसायन पर तैयार हुई है। अब तक की सबसे सस्ती टेस्टकिट है। विवेक पेरुमल बताते हैं कि इससे एक बार दो-ढाई घंटे के भीतर 96 सैंपल टेस्ट किए जा सकेंगे।
इसका परिणाम भी 100 फीसदी तक की शुद्धता देने वाला है। विवेक पेरुमल बताते हैं कि आईसीएमआर ने इसके सेंसिटिव और स्पेसिफिक करेक्टर को 100 फीसदी की शुद्धता वाला माना है। प्रो. वी रामगोपाल राव और प्रो. पेरुमल दोनों का मानना है कि यह किट मई के आखिरी सप्ताह तक आ जाएगी।
इससे जांच 500 रुपये के भीतर हो जाएगी। इसके बाद जांच में काफी क्रांतिकारी बदलाव आएगा, क्योकि अभी इस तरह की जांच में 4500 रुपये तक लग जाते हैं।
पुणे की माई लैब ने भी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और एपी ग्लोबल के सहयोग से बड़े पैमाने पर टेस्ट किट उत्पादन में लगी है। कंपनी के प्रबंध निदेशक हंसमुख रावल की टीम ने पहले साढ़े छह लाख किट की आपूर्ति की थी, लेकिन बताते हैं कि आने वाले समय दो लाख नमूनों की जांच की जा सकती है।
आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों को भी उम्मीद है कि आने वाले समय में भारत कई लाख प्रतिदिन नमूनों की जांच की क्षमता हासिल कर सकता है। इसके बाद कोविड-19 संक्रमण की जांच, इलाज में तेजी आ सकती है।
उच्चस्तरीय सूत्र का कहना है कि कुछ तो गड़बड़ हुई है। हड़बड़ी में भी कुछ निर्णयों से परेशानी बढ़ गई, लेकिन ऐसा हो जाता है। जब अचानक कुछ ऐसा होता है तो इस तरह की स्थितियां पैदा हो जाती हैं। सूत्र का कहना है कि कोविड-19 संक्रमण के बारे में कोई नहीं जानता था।
जांच और विश्वसनीय इलाज अभी दुनिया में किसी के पास नहीं है। सूत्र का कहना है कि चीन के बाद भारत बड़ी आबादी वाला देश है। यह बात अलग है कि चीन में संसाधनों की प्रचुरता है। इसकी तुलना में भारत में आबादी, घनी आबादी ज्यादा है।