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बॉम्बे हाईकोर्ट का आरे पर तत्काल सुनवाई से इनकार, कहा- चीफ जस्टिस से मिलें, 29 लोग जेल भेजे गए

Sat, 05 Oct 2019 06:13 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
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Aarey Protest - फोटो : ANI
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई के हरियाली भरे क्षेत्र आरे कॉलोनी में लगे पेड़ों की कटाई के आदेश पर रोक लगाने से मना कर दिया। आरे मामले के कुछ कार्यकर्ताओं ने शनिवार को पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए कोर्ट में मामले की तत्काल सुनवाई की अपील की थी। न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी ने मामले में तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ताओं से बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से संपर्क करने को कहा है।

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इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई का विरोध करने वाली सभी याचिकाएं खारिज करने के बाद शुक्रवार को पेड़ काटने का काम शुरू हो गया था। कटाई का विरोध कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने पेड़ काटना शुरू कर दिया है। वहीं विरोध कर रहे 29 प्रदर्शनकारियों को बोरिवल्ली कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। 
 

पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आरे जंगलों में कटाई को लेकर कहा कि बॉम्बे उच्च न्यायालय ने कहा है कि यह जंगल नहीं है। जब दिल्ली में पहले मेट्रो स्टेशन का निर्माण किया जा रहा था, तो उस दौरान भी 20-25 पेड़ काटे जाने थे। तब भी लोगों ने विरोध किया था, लेकिन प्रत्येक पेड़ को काटने के बदले, पांच पेड़ लगाए गए थे। 
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पर्यावरण मंत्री ने आगे कहा कि दिल्ली में कुल 271 मेट्रो स्टेशन बने हैं, साथ ही पेड़ क्षेत्र भी बढ़ा है। यही प्रकृति का विकास और संरक्षण है। 

मुंबई पुलिस ने हालात को देखते हुए मुंबई के आरे जंगलों में मेट्रो-रेल परियोजना स्थल के पास के क्षेत्र में सीआरपीसी की धारा 144 लागू कर दी गई है। पुलिस ने कहा कि शुक्रवार रात से ही 38 प्रदर्शनकारियों पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। वहीं, गिरफ्तार किए गए कम से कम 38 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ धारा 353, 332, 143 और 149 के तहत मामला दर्ज किया गया है। विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाली शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी को भी हिरासत में ले लिया गया।

विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ शिवसेना-भाजपा गठबंधन को निशाना साधते हुए कहा कि वे पेड़ों को बचाने में विफल रहे हैं।

एक कार्यकर्ता ने कहा कि इलाके में भारी पुलिस की तैनाती है। किसी को भी आरे कॉलोनी में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। यहां तक कि पर्यटकों को भी रोका जा रहा है। शिवसेना की उपनेता प्रियंका चतुर्वेदी प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने और विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रदर्शन स्थल पर पहुंची, उन्हें पुलिस ने हालात को देखते हुए तुरंत हिरासत में ले लिया। 

आरे मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा: उद्धव

शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा है कि आरे कॉलोनी में हो रही पेड़ों की कटाई को वे बहुत गंभीरता से ले रहे हैं। 

उन्होंने कहा, "आरे, अभी मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। आज जो कुछ भी हो रहा है, जो कुछ भी हो रहा था और जो कुछ भी भविष्य में होगा, मैं विस्तृत और गहन जानकारी लूंगा कि स्थिति क्या है और इस मुद्दे पर मजबूती से और सीधे बात करूंगा। 

ठाकरे ने आगे कहा, "आने वाली नई सरकार हमारी सरकार होगी और हमारी सरकार एक बार फिर से सत्ता में आती है, तो हम आरे वन के हत्यारों से सबसे बेहतर तरीके से निपटेंगे।" 







बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद, पेड़ों की कटाई के खिलाफ आरे जंगलों में कल रात विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। दूसरी लोगों ने कहा कि जिन 2600 से अधिक पेड़ों को काटा जाना है, उनमें से 800 पेड़ अब तक काटे गये हैं।

हालांकि, कुछ देर में ही प्रदर्शनकारी भी वहां पहुंच गए और मेट्रो रेल साइट पर जमकर नारेबाजी की। सोशल मीडिया पर पेड़ों को काटने का वीडियो वायरल हो गया, लेकिन मुम्बई मेट्रो रेल निगम के अधिकारियों ने अब तक इसकी पुष्टि नहीं की है, कि वाकई नियोजित मेट्रो कार शेड के लिए पेड़ों की कटाई शुरू हो गयी है।

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आदित्य ठाकरे ने कहा मेट्रो अधिकारियों को भेजें पीओके

वहीं शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने भी जंगलों को काटे जाने का विरोध किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि, 'केंद्र सरकार के जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अस्तित्व में आने या प्लास्टिक प्रदूषण के बारे में बात करने का कोई मतलब नहीं है, जब मुंबई मेट्रो के तृतीय परियोजना के तहत आरे कॉलोनी के आसपास के क्षेत्र को नष्ट किया जा रहा है। मेट्रो द्वारा इसे अहंकार की लड़ाई बनाना केंद्र सरकार के उद्देश्य को नष्ट कर रही है।

शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने शनिवार को ट्वीट किया कि मुंबई मेट्रो के तृतीय परियोजना के अधिकारियों को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में पेड़ों के बजाय आतंकी शिविरों को नष्ट करने के लिए तैनात किया जाना चाहिए।

उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि कुछ पर्यावरणविदों और यहां तक कि शिवसेना के सदस्यों ने भी पेड़ों को कटने से रोकने का प्रयास किया। शिवसेना के युवा नेता ने कहा कि क्षेत्र में बढ़ती पुलिस उपस्थिति और वनों की कटाई के साथ, मुंबई मेट्रो के तृतीया परियोजना वह सब कुछ नष्ट कर रही है जो भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा था। 

ठाकरे ने कहा कि आश्चर्य है कि मुंबई मेट्रो मुंबईकरों के साथ अपराधियों की तरह व्यवहार क्यों कर रही है और आखिर क्यों उनकी स्थायी मांग को नहीं सुन रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को प्लास्टिक प्रदूषण के बारे में बताने या बोलने की आवश्यकता नहीं है, जब मुंबई मेट्रो मुंबई के फेफड़े कहे जाने वाले आरे के जंगलों को नष्ट कर रही है। 

गौरतलब है कि प्रस्तावित कार शेड स्थल पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किये गये हैं, क्योंकि शुक्रवार देर रात सैकड़ों लोग पेड़ों को काटने से रोकने के लिए पहुंच गये थे। कई ट्वीट कर इस मुद्दे पर देवेंद्र फडणवीस सरकार और बृहन्मुम्बई महानगरपालिका की निंदा भी की गयी है।

आम आदमी पार्टी की नेता प्रीति मेनन शर्मा ने कहा कि, 21 अक्टूबर को होने जा रहे विधानसभा चुनाव के बीच पेड़ काटना चुनाव संहिता का उल्लंघन है।
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