कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और विधान परिषद सदस्य सीटी रवि के हिरासत से जुड़े मामले में एक पुलिस निरीक्षक को निलंबित कर दिया गया है। दरअसल, रवि की हिरासत के दौरान नेताओं और अन्य लोगों को कथित तौर पर थाने के अंदर जाने देकर कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस निरीक्षक के निलंबन का आदेश 21 दिसंबर को बेलगावी के उत्तरी क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय द्वारा जारी किया गया।
19 दिसंबर को पुलिस ने किया था गिरफ्तार
सीटी रवि को विधान परिषद हॉल में मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर के खिलाफ अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल करने के आरोप में 19 दिसंबर को बेलगावी में सुवर्ण विधान सौध के परिसर से पुलिस ने गिरफ्तार किया था। कर्नाटक हाईकोर्ट ने 20 दिसंबर को अपने अंतरिम आदेश में रवि की तत्काल रिहाई का आदेश दिया था, जिसमें कहा गया कि पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करने में प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। हालांकि, पीठ ने रवि को जांच में सहयोग करने और पूछताछ के लिए उपलब्ध रहने का निर्देश दिया।
खानपुरा पुलिस थाने क्या किया था स्थानांतरित?
इससे पहले पुलिस ने बताया था कि हीरेबागेवाड़ी पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 75 (यौन उत्पीड़न) और 79 (किसी महिला की मर्यादा का अपमान करने के इरादे से शब्द, इशारा या कार्य) के तहत मामला दर्ज करने के बाद रवि को हिरासत में लिया गया था और जांच अधिकारियों को सौंप दिया गया था। सुरक्षा कारणों और हीरेबागेवाड़ी पुलिस थाने के पास जमा हुई भारी भीड़ को देखते हुए रवि को खानपुरा पुलिस थाना स्थानांतरित कर दिया गया था।
पुलिस निरीक्षक को निलंबित करने का आदेश जारी
- आधिकारिक आदेश के अनुसार, जब रवि को सुरक्षा कारणों से खानपुरा थाने ले जाया गया तो थाने के प्रभारी पुलिस निरीक्षक मंजूनाथ नायक को कर्मियों को उनके दायित्यों के मुताबिक तैनात करने के लिए कहा गया। थाने के अंदर आरोपी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति का प्रवेश रोकने का भी आदेश दिया गया था। इसके बावजूद कई नेता और मीडियाकर्मी थाने के अंदर घुस गए जिससे थाने के अंदर शोरगुल होने लगा।
- आदेश में कहा गया कि एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी होने के नाते नेताओं को खानपुर पुलिस थाने में प्रवेश करने से रोकने के कर्तव्य का पालन करने में नायक विफल रहे, जिससे अशांतिपूर्ण माहौल पैदा हो गया। नायक ने वरिष्ठों के आदेश का उल्लंघन किया, कर्तव्य का पालन करते समय लापरवाही दिखाई जिसके कारण विभागीय जांच शुरू की गई और नायक को कर्तव्य की उपेक्षा के लिए तत्काल प्रभाव से सेवा से निलंबित कर दिया गया।