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Mumbai police: बाल यौन शोषण के केस दर्ज करने से पूर्व एसीपी की मंजूरी जरूरी, फरमान पर भाजपा नेता के सवाल

सार

चित्रा वाघ ने शनिवार को पुणे में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि इस बारे में 6 जून को मुंबई के पुलिस आयुक्त ने परिपत्र जारी किया है। वाघ ने सवाल किया कि क्या आयुक्त ऐसा आदेश जारी कर सकते हैं?  
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mumbai police headquarters - फोटो : Mumbai police
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विस्तार
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मुंबई पुलिस ने यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) कानून के तहत केस दर्ज करने के पहले संबंधित अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ACP की मंजूरी लेने का फरमान जारी किया है। इस पर महाराष्ट्र की भाजपा नेता चित्रा वाघ ने सवाल उठाते हुए निंदा की है। 
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वाघ ने शनिवार को पुणे में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर  कहा कि इस बारे में 6 जून को मुंबई के पुलिस आयुक्त ने परिपत्र जारी किया है। वाघ ने सवाल किया कि क्या आयुक्त ऐसा आदेश जारी कर सकते हैं?  मुंबई पुलिस के परिपत्र में कहा गया है कि शिकायतकर्ता की पुरानी दुश्मनी या संपत्ति विवाद आदि के कारण कभी-कभी पोस्को कानून के तहत और छेड़छाड़ आदि के मामले दर्ज किए जाते हैं। इसमें कहा गया है कि लोगों को बिना सत्यापन के गिरफ्तार किया जाता है और बाद में छोड़ दिया जाता है। यह गिरफ्तार व्यक्ति की छवि को खराब करता है। इस स्थिति को रोकने के लिए, सभी पुलिस कर्मियों को ऐसे मामले दर्ज करने से पहले एसीपी की अनुमति लेना होगी। 

अपराधियों को बचाने की कोशिश?
इस फरमान पर भाजपा नेता वाघ ने कहा कि क्या मुंबई पुलिस महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को बचाने की कोशिश कर रही है? इस आदेश को वापस लिया जाना चाहिए। क्या राज्य के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को इस परिपत्र के बारे में पता है? असल में यह अवैध है। 
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