उत्तर प्रदेश के लखनऊ और आगरा शहर में स्थित शीरोज कैफे में एसिड अटैक पीड़िताएं काम करती हैं। यह कैफे एक मुहिम के तहत एसिट अटैक पीड़िताओं को फिर से जीने का मौका प्रदान करता है। लेकिन लॉकडाउन के कारण कैफे बंद हो गया और यहां काम करने वाली लड़कियों को घर लौटना पड़ा।
वहीं, 'स्टॉप एसिड अटैक' अभियान चलाने वाले छांव फाउंडेशन ने इन लड़कियों के लिए मदद का हाथ बढ़ाया। फाउंडेशन ने शीरोज कैफे में काम करने वाली 30 एसिड अटैक पीड़िताओं की मदद के लिए एक अभियान की शुरुआत की।
इसने एक जून को क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म मिलाप पर एक ऑनलाइन फंड रेजिंग शुरू की। 10 दिनों के भीतर, फाउंडेशन को इतना पैसा मिल गया कि वह अगले छह महीनों के लिए महिलाओं को 5,000 रुपये की मासिक सहायता सुनिश्चित करने की स्थिति में पहुंच गया।
यूके स्थित चैरिटी 'ए-सिस्टरहुड' के साथ एक अन्य फंड रेजिंग अभियान तीन जून को किया गया। इसमें 40 मिनट के भीतर 900 प्रतिभागियों ने 19 लाख रुपये जुटाने में मदद की। इससे हर किसी को छह महीने के लिए 10,000 रुपये महीने का भुगतान किया जा सकता है। इस कार्यक्रम की मेजबानी मिस यूनिवर्स ग्रेट ब्रिटेन एम्मा जेनकिंस ने की।
इसके बाद, सभी सुरक्षा उपायों के साथ 8 जून को लखनऊ में स्थित कैफे फिर से खुल गया। हालांकि, कैफे में पहले की तरफ भीड़ नहीं है। कोरोना के डर के कारण, 22 टेबल्स में से केवल 7-8 ही बुक हो पाती हैं। लेकिन कैफे में नियमित रूप से आने वाले लोग फिर से वापस आ रहे हैं।
पिछले तीन वर्षों से इस कैफे के संरक्षक राजीव शंकर ने कहा कि यहां आने से मैं न केवल पीड़ितओं की मदद करता हूं, बल्कि उसके बाद खुद की भी मदद करता हूं। चूंकि कैफे बड़ा है, इसलिए यहां सामाजिक दूरी के नियम का पालन किया जा सकता है।
शीरोज कैफे वर्तमान में आर्थिक रूप से सुरक्षित हैं, लेकिन छांव फाउंडेशन इससे जुड़ी 100 एसिड अटैक पीड़िताओं की मदद करने के लिए कोशिश कर रहा है। छांव फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक आशीष शुक्ला ने कहा कि लोगों को दान करने के लिए मिलाप फंड रेजिंग अभी भी ऑनलाइन है ताकि हम 100 पीड़िताओं की बेहतर मदद कर सकें।