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सुप्रीम कोर्ट के रुख के मुताबिक भावी रणनीति तैयार करेंगे किसान और केंद्र

Mon, 11 Jan 2021 04:05 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
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आंदोलन कर रहे किसान - फोटो : अमर उजाला
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तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन के लिए सोमवार का दिन बेहद अहम साबित हो सकता है। इसी दिन सुप्रीम कोर्ट इससे जुड़े सभी मामलों की सुनवाई करेगा।

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सरकार और किसान संगठन दोनों की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के रुख पर टिकी है। दोनों ही पक्ष इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के रुख के अनुरूप ही भावी रणनीति तैयार करेंगे। इस मामले में दोनों पक्षों के बीच हुई आठ दौर की बातचीत बेनतीजा रही है।

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार की सुनवाई के लिए सरकार ने व्यापक तैयारी की है। सुनवाई के दौरान सरकार दलील देगी कि किसान संगठन वार्ता के जरिये हल निकालने के इच्छुक नहीं हैं। इस दौरान सरकार यह भी दलील देगी कि उसकी ओर से किसान संगठनों को बार-बार वार्ता के लिए बुलाया गया है।
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सरकार ऐसे संगठनों का भी नाम लेगी जो इन कानूनों के समर्थन में हैं। सरकार की ओर से कहा जाएगा कि कानून का विरोध देश के कुछ राज्यों और कुछ किसान संगठनों तक ही सीमित है। सरकार यह भी बताएगी कि उसने अपनी ओर से तीनों कानूनों के 21 प्रावधानों में संशोधन का भी प्रस्ताव किसान संगठनों को दिया था। सरकार के रणनीतिकारों को उम्मीद है कि इस सुनवाई से विवाद खत्म करने के लिए बीच का रास्ता निकल सकता है।

किसान संगठनों को भी उम्मीद, अस्थाई रोक से प्रावधानों का वापस लेगी सरकार
किसान संगठनों ने भी इस सुनवाई से ढेरों उम्मीद पाल रखी हैं। दरअसल सुनवाई के शुरुआती दौर में शीर्ष अदालत ने वार्ता जारी रहते तीनों कानूनों को लागू करने पर अस्थाई रोक लगाने का सुझाव दिया था।

किसान संगठनों को लगता है कि कानूनों पर अस्थाई रोक के बाद बातचीत से विवाद का हल निकाला जा सकता है। ऐसी स्थिति में सरकार ज्यादातर विवादास्पद प्रावधानों को वापस लेने और एमएसपी पर ही फसल खरीद का कोई बेहतर मॉडल तैयार कर सकेगी।

बातचीत से निपटारे पर शीर्ष अदालत ने दिया था जोर
अब तक हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने विवाद के निपटारे के लिए चर्चा पर जोर दिया था। बीते हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने आंदोलन के कारण कोरोना संक्रमण के खतरे पर चिंता जाहिर की थी। सरकार से आंदोलन के दौरान कोरोना प्रोटोकॉल को पूरा करने संबंधी जानकारी मांगी थी।

इसके बाद हुई आठवें दौर की बातचीत में भी किसान संगठन कानूनों की वापसी और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी की मांग पर अड़े रहे। जबकि सरकार ने साफ कर दिया कि वह कानून वापसी की जगह उन प्रावधानों पर चर्चा करेगी जिस पर किसान संगठनों को आपत्ति है।

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