राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एंव प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने निरंतर एवं व्यापक मूल्यांकन (सीसीई) के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। एनसीईआरटी ने उसमें कहा है कि बच्चों के अच्छे प्रदर्शन के लिए उनकी तुलना उनके पहले के प्रदर्शन से की जानी चाहिए। माता पिता या फिर शिक्षकों को उनकी तुलना दूसरे बच्चों के ग्रेड या अंकों से नहीं करनी चाहिए। साथ ही बच्चों की प्रतिभा का मूल्यांकन उनके ग्रेड या अंकों से भी नहीं किया जाना चाहिए।
मूल्यांकन का मतलब बताया
एनसीईआरटी ने मूल्कांयन का मतलब बताते हुए कहा, 'मूल्यांकन का मतलब आमतौर पर अंक, ग्रेड या अन्य साधनों से छात्रों के प्रदर्शन की तुलना करना माना जाता है, जिसमें उनकी कमजोरी को सामने लाया जाता है। लेकिन उससे उनका अपमान होता है और उनके आत्मसम्मान को भी ठेस पहुंचती है।' दिशा निर्देशों के मुताबिक मूल्यांकन का यह मतलब नहीं है।
ऐसे बढ़ेगा बच्चों का आत्मविश्वास
एनसीईआरटी के दिशा निर्देशों के मुताबिक यदि बच्चों के प्रदर्शन की तुलना उनके सहपाठियों से करने की बजाय उनके पहले के प्रदर्शन से की जाए तो इससे उनके विकास और सीखने की जरूरतों के बारे में पता चल पाएगा। इसके बाद बच्चे अपमानित होने की बजाय और भी बेहतर प्रदर्शन कर करेंगे। इससे वह और भी अधिक सीख सकेंगे और उनके आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी होगी।