बारिश, भूस्खलन और बिजली गिरने से देश के 335 जिले प्रभावित हुए हैं, जिनमें मध्य प्रदेश के 40 जिले हैं, जबकि असम के 30 और उत्तर प्रदेश के 27 जिले प्रभावित हुए हैं। मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन से हिमाचल प्रदेश के 12 जिले और उत्तराखंड के सात जिले भी प्रभावित हुए हैं।
देश में इस साल मानसून के दौरान बाढ़, बिजली गिरने और भूस्खलन के कारण कम से कम 2,038 लोगों की मौत हुई है, जिसमें बिहार में सबसे अधिक 518 और हिमाचल प्रदेश में 330 लोगों की मौत हुई।केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस साल एक अप्रैल से 17 अगस्त के बीच बारिश और बाढ़ के कारण 101 लोग लापता हो गए जबकि 1,584 लोग घायल हो गए।
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बारिश, भूस्खलन और बिजली गिरने से देश के 335 जिले प्रभावित हुए हैं, जिनमें मध्य प्रदेश के 40 जिले हैं, जबकि असम के 30 और उत्तर प्रदेश के 27 जिले प्रभावित हुए हैं। मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन से हिमाचल प्रदेश के 12 जिले और उत्तराखंड के सात जिले भी प्रभावित हुए हैं।
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में बाढ़ के कारण 892 लोग डूब गए, जबकि बिजली गिरने से 506 लोगों की मौत हो गई, वहीं भूस्खलन से 186 लोगों की मौत हो गई। मानसून के दौरान विभिन्न अन्य वजहों से कुल 454 लोगों की भी मौत हुई। बिहार और हिमाचल प्रदेश के अलावा, गुजरात में बारिश, बाढ़, भूस्खलन और बिजली गिरने से 165, मध्य प्रदेश में 138, कर्नाटक और महाराष्ट्र में 107-107, छत्तीसगढ़ में 90 और उत्तराखंड में 75 लोगों की मौत हो गई।
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राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की कुल 160 टीमें विभिन्न राज्यों में तैनात की गई हैं। आंकड़ों में बताया गया है कि हिमाचल प्रदेश में एनडीआरएफ की 17 टीमें तैनात की गई हैं, जबकि महाराष्ट्र में 14, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में 12-12, असम और पश्चिम बंगाल में 10-10 और उत्तराखंड में नौ टीमें तैनात की गई हैं।