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सफर करने के लिए भारतीयों को चाहिए 30 लाख बसें, सिर्फ 3 लाख मौजूद

Sat, 08 Sep 2018 09:24 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत में सामान्य लोगों को यात्रा के लिए 30 लाख बसों की आवश्यकता है लेकिन ये हैरानी की बात है कि देश में केवल 3 लाख बसें ही उपलब्ध हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में 19 लाख बसें हैं लेकिन उनमें से केवल 2.8 लाख ही सड़कों पर दौड़ रही हैं।

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यूनियन ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी वाईएस मलिक का कहना है, 'सामान्य यात्रियों के लिए हमें 30 लाख बसों की आवश्यकता है। जो राज्य परिवहन इकाइयों के द्वारा चलाई जाती हैं, वो ऊपरी स्तर पर भी ऑपरेट हो रही हैं। तो यहां एक बहुत बड़ा अंतर है।' वहीं सार्वजनिक परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि सेवा की गुणवत्ता गिरने और बसों की कमी भी लोगों को निजी वाहनों के लिए प्रेरित कर रही है, वो भी शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में।'

वहीं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि जहां चीन में एक हजार लोगों के लिए 6 बसें हैं वहीं भारत में दस हजार लोगों के लिए महज 4 बसें हैं। करीब 90 फीसदी भारतीय ऐसे हैं जिनके पास खुद का कोई वाहन नहीं है। वह शेयरिंग वाले वाहनों पर निर्भर हैं। इसका मतलब है कि सार्वजनिक परिवहन में सुधार की जरूरत है।
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उन्होंने कहा कि लोगों को ट्रांसपोर्ट जैसे मॉडल के साथ आगे आना चाहिए, जैसे कि लंदन में होता है। उन्होंने निर्माताओं से आग्रह किया है कि बसों के निर्माण के अलावा वह ऑपरेटिंग कंपनी के साथ आगे आएं। जिससे उन्हें व्यवसाय मिलेगा। अगर उसमें टाटा, अशोक लेलैंड जैसे निवेशक निवेश करेंगे तो बसों में वृद्धि होगी।

इसपर शहरी परिवहन क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि मेट्रो रेल के नेटवर्क बढ़ाने की बजाय बसों की संख्या को बढ़ाना आवश्यक है। लंदन में भी कम रेल नेटवर्क है लेकिन अधिकतर लोग बसों से सफर करते हैं। वहां 317 लाख यात्रियों में से 67 लाख बसों में सफर करते हैं। 

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