सीमा सहित अन्य विवाद सुलझाने के लिए चीन भारत के साथ 10 साल का संधि करार करना चाहता है। चीन ने इससे संबंधित मसौदा भी भारत को सौंपा है। इस आशय की जानकारी देते हुए भारत में चीन के राजदूत लूओ झाओहुई ने कहा कि हम दोबारा दोकलम जैसा विवाद नहीं चाहते।
चीनी राजदूत ने इस दौरान भारत, पाकिस्तान और चीन के बीच त्रिपक्षीय शिखर वार्ता की भी वकालत की। एक बयान में उन्होंने कहा कि चीन की ओर से भारत के समक्ष इस आशय की भी पेशकश की गई है। चूंकि भारत और पाकिस्तान दोनों हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन (
एससीओ) का हिस्सा बने हैं। ऐसे में यह अहम मंच दोनों देशों को करीब लाने में मदद कर सकता है।
राजदूत लूओ ने कहा कि भारत और चीन दोनों अहम पड़ोसी हैं। विकास और शांति का लक्ष्य हासिल करने के लिए दोनों के बीच दोस्ती जरूरी है। हमारे पास बेस्ट हार्डवेयर है तो भारत के पास बेस्ट सॉफ्टवेयर। दोनें देशों को मिल कर कुछ ताकतों का सामना करना है। दोनों देशों को पता है कि पड़ोसी देश होने के नाते कोई दूर नहीं भाग सकता। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा को लेकर विवाद है। महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की विदेश नीति में समानता दिखती है। उन्होंने कैलाश मानसरोवर यात्रा में चीन की ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की भी बात कही।
मध्यस्थता की पेशकश
चीन ने भारत के साथ संधि करार के साथ भारत पाकिस्तान के बीच विवाद सुलझाने के लिए मध्यस्थता की भी पेशकश की। चीनी राजदूत ने कहा कि चीन की ओर से त्रिपक्षीय शिखरवार्ता की पेशकश की गई है। भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद को टालने में एससीओ अहम भूमिका निभा सकता है।