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मुंबई में छतों पर बने केवल चार रेस्टोरेंट ही हैं वैध: बीएमसी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Updated Sun, 23 Sep 2018 11:21 AM IST
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नगर निगम कमिश्नर द्वारा बीते साल नवंबर में लागू की गई विवादास्पद रूफटॉप पॉलिसी के बाद मुंबई में 16 रेस्टोरेंट को खुली छत पर चलाने की मंजूरी मिली थी। लेकिन लोग अभी भी शिकायत कर रहे हैं कि ऐसा नहीं है, अभी भी कई रेस्टोरेंट खुली छतों पर चल रहे हैं। वहीं मामले पर  बीएमसी (बृहन्मुंबई नगर निगम) का कहना कि केवल 4 रेस्टोरेंट को ही मंजूरी दी गई है।

नगर निगम अधिकारी ने पहचान न बताने की शर्त पर बताया कि होटलों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया काफी कड़ी है, जिसके कारण रेस्टोरेंट मालिक आवेदन नहीं करते हैं। वह डरते हैं कि उनके आवेदन को मंजूरी नहीं दी जाएगी और वह रडार पर आ जाएंगे।



अतिरिक्त नगरपालिका आयुक्त आईए कुंदन ने बताया कि लाइसेंस के लिए  आवेदन करने वाले ज्यादातर होटल मालिक जी साउथ के होते हैं। जिसमें कमला मिल भी शामिल है। उन्होंने कहा कि उन्हें 16 आवेदन मिले थे, जिनमें से 12 की अभी भी जांच की जा रही है। साथ ही चार को मंजूरी दे दी गई है।

मामले पर एक कार्यकर्ता का कहना है कि अभी भी कई रेस्टोरेंट छतों पर चल रहे हैं। जहां हुक्का आदि भी होता है। उन्हें नोटिस भेजे जाते हैं जिसके बाद कुछ समय के लिए वह होटल बंद कर देते हैं लेकिन बाद में दोबारा काम शुरू कर देते हैं।

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नगर निगम कमिश्नर द्वारा बीते साल नवंबर में लागू की गई विवादास्पद रूफटॉप पॉलिसी के बाद मुंबई में 16 रेस्टोरेंट को खुली छत पर चलाने की मंजूरी मिली थी। लेकिन लोग अभी भी शिकायत कर रहे हैं कि ऐसा नहीं है, अभी भी कई रेस्टोरेंट खुली छतों पर चल रहे हैं। वहीं मामले पर  बीएमसी (बृहन्मुंबई नगर निगम) का कहना कि केवल 4 रेस्टोरेंट को ही मंजूरी दी गई है।

नगर निगम अधिकारी ने पहचान न बताने की शर्त पर बताया कि होटलों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया काफी कड़ी है, जिसके कारण रेस्टोरेंट मालिक आवेदन नहीं करते हैं। वह डरते हैं कि उनके आवेदन को मंजूरी नहीं दी जाएगी और वह रडार पर आ जाएंगे।

अतिरिक्त नगरपालिका आयुक्त आईए कुंदन ने बताया कि लाइसेंस के लिए  आवेदन करने वाले ज्यादातर होटल मालिक जी साउथ के होते हैं। जिसमें कमला मिल भी शामिल है। उन्होंने कहा कि उन्हें 16 आवेदन मिले थे, जिनमें से 12 की अभी भी जांच की जा रही है। साथ ही चार को मंजूरी दे दी गई है।

मामले पर एक कार्यकर्ता का कहना है कि अभी भी कई रेस्टोरेंट छतों पर चल रहे हैं। जहां हुक्का आदि भी होता है। उन्हें नोटिस भेजे जाते हैं जिसके बाद कुछ समय के लिए वह होटल बंद कर देते हैं लेकिन बाद में दोबारा काम शुरू कर देते हैं।

बीएमसी ने बनाए नए नियम

बीएमसी की रिपोर्ट में भी ये बात सामने आई है कि कमला मिल के जिस रेस्टोरेंट में आग लगी थी, उस होटल की तरफ से नो ऑबजेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) पाने के लिए होटल के पुराने फोटो जमा किए गए थे।

जिसके बाद बीएमसी ने सभी रेस्टोरेंट को फोटो और एनओसी की तारीख भी अपलोड करने का आदेश दिया है।  

नगर निगम के नए नियमों के मुताबिक अब अगर कोई भी होटल मालिक एनओसी का दूसरा लेवल यानि पहले एनओसी के एक्सपायर होने पर अगली डेट का लेने जाएगा तो उसे अन्य कागजों के साथ पहली एनओसी को भी उसमें संलगन करना होगा। आवेदक को होटल की फोटो भी लगानी होगी।

नए नियमों के मुताबिक पहले स्वास्थ्य विभाग का स्टाफ परिसर का  निरीक्षण करेगा कि वह स्वास्थ्य और सफाई के लिहाज से कितना ठीक है और इस बात का भी ध्यान रखेगा कि वह सभी नियमों का पालन कर रहा है या नहीं।

ऐसी ही सारी प्रक्रियाएं खत्म होने के बाद असिस्टेंट कमिश्नर की मंजूरी लेनी होगी, इसके बाद लाइसेंस की फीस देनी होगी। जिसके बाद लाइसेंस जारी होगा।
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