राजीव गांधी के छह हत्यारों की रिहाई से कांग्रेस असहमत है। पार्टी ने जहां सरकार से पूछा है कि क्या वह सुप्रीम कोर्ट के रिहाई के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करेगी? वहीं, वरिष्ठ वकील व कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सोनिया व प्रियंका गांधी ने भले ही दोषियों को माफ कर दिया हो, लेकिन पार्टी इस फैसले से संतुष्ट नहीं है। मामले में कांग्रेस की राय द्रमुक से अलग रही है।
सिंघवी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के रिहाई के फैसले ने देश की आत्म को झकझोर दिया है। उन्होंने उस उक्ति को दोहराया कि 'न्याय न सिर्फ होना चाहिए, बल्कि वह होते हुए दिखना भी चाहिए।' रिहाई का एकतरफा पूर्ण अधिकार नहीं है। हर मामला परिस्थितियों पर निर्भर करता है। सिंघवी ने कहा कि रिहाई के खिलाफ जो भी कानूनी कार्रवाई संभव होगी, हम वह करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई को लेकर कांग्रेस की राय तमिलनाडु में सत्तारूढ़ पार्टी की सहयोगी पार्टी द्रमुक की राय से हमेशा भिन्न रही है।
माफी के सोनिया के विचार से सहमत नहीं
सिंघवी हत्यारों को सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी द्वारा सार्वजनिक रूप से माफ करने से भी असहमत दिखे। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी के अपने विचार हैं, लेकिन पार्टी उस विचार से सहमत नहीं है। हम उनके दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं। इस मामले में तमिलनाडु और कांग्रेस का रुख हमेशा अलग रहा है।
सुरजेवाला ने पूछे पीएम से चार सवाल
उधर, कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने भी राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों की रिहाई के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संविधान के बुनियादी सिद्धांतों की अनदेखी बताया। उन्होंने इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चार सवाल पूछते हुए कहा है कि क्या केंद्र की भाजपा सरकार इस निर्णय पर पुनर्विचार याचिका देगी। सुरजेवाला ने कहा कि राजीव गांधी के हत्यारे उग्रवादियों को जेल से रिहा करने का निर्णय अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। आज उग्रवाद के खिलाफ लड़ने की हर देशवासी की मूल भावना हार गई और सबसे युवा पीएम की हत्या के घाव फिर हरे हो गए। उन्होंने सवाल उठाए कि क्या प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार पूर्व पीएम राजीव गांधी के हत्यारे उग्रवादियों की रिहाई का समर्थन करती है? मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष क्यों नहीं रखा? क्या उग्रवाद पर मोदी सरकार का ये दोहरा रवैया नहीं है? क्या भाजपा सरकार निर्णय पर पुनर्विचार याचिका देगी?
करोड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भावना आहत : सीएम भूपेश बघेल
उधर, छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने कहा है कि हत्यारों की रिहाई से देश के करोड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत हुई हैं। रिहाई नहीं होना थी।
1991 में हुई थी राजीव गांधी की हत्या
21 मई, 1991 को राजीव गांधी की हत्या के मामले में एसआईटी ने कुल 41 लोगों को आरोपी बनाया, जिनमें से 12 पहले ही मारे जा चुके थे। तीन कभी पकड़े नहीं जा सके। शेष 26 दोषियों को टाडा अदालत ने 28 जनवरी, 1998 को मौत की सजा सुनाई। 11 मई, 1999 में सुप्रीम कोर्ट ने 19 दोषियों को बरी करते हुए सात में से चार (नलिनी, मुरुगन, संथन और पेरारिवलन) को मृत्युदंड दिया और तीन (रविचंद्रन, रॉबर्ट पायस और जयकुमार) को उम्रकैद की सजा सुनाई। अप्रैल 2000 में सोनिया गांधी की तरफ से दया याचिका के आधार पर नलिनी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया, जबकि शेष आरोपियों की दया याचिका 2011 में राष्ट्रपति ने ठुकरा दी और 9 सितंबर, 2011 को फांसी देना तय हुआ, लेकिन मद्रास हाईकोर्ट के दखल पर फांसी टल गई।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राजी गांधी हत्याकांड के दोषियों नलिनी श्रीहरन व आरपी रविचंद्रन समेत सभी छहों की रिहाई का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद नलिनी श्रीहरन, रविचंद्रन, संथन, मुरुगन, रॉबर्ट पायस और जयकुमार की रिहाई हो गई। नलिनी श्रीहरन व रविचंद्रन ने समय से पहले रिहाई की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
तमिलनाडु सरकार ने किया रिहाई का समर्थन
बता दें, राजीव गांधी हत्याकांड के सात दोषियों ने समय से पहले रिहाई की मांग की थी। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों नलिनी श्रीहरन और आरपी रविचंद्रन की समय से पहले रिहाई का समर्थन किया था। उम्रकैद की सजा काट रहे 6 दोषियों की रिहाई पर तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने प्रतिक्रिया ही है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मैं 6 लोगों की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं। यह फैसला इस बात का सबूत है कि निर्वाचित सरकार के फैसलों को राज्यपालों द्वारा नियुक्त पदों पर नहीं टाला जाना चाहिए।