कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके जहां देशभर में युवाओं के आंदोलन का बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके परिवार के पास शादी के प्रस्तावों की भी भरमार है। अभिजीत की मां अनीता दीपके चाहती हैं कि बेटे की शादी इसी साल दिसंबर या अगले साल जनवरी तक हो जाए। हालांकि, परिवार का कहना है कि शादी कब और किससे होगी, इसका अंतिम फैसला 30 वर्षीय अभिजीत ही करेंगे।
बेटा अपना घर बसा ले, लेकिन वे उस पर कोई दबाव नहीं डालेंगे- अनीता दीपके
अनीता दीपके ने छत्रपति संभाजीनगर में मीडिया से बातचीत में बताया कि अभिजीत के लिए शादी के प्रस्ताव नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन शुरू होने से पहले से ही आने लगे थे और अब उनकी संख्या और बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि जब अभिजीत बोस्टन में थे, तब इस बारे में फोन पर बात हुई थी। उस समय उन्होंने केवल मुस्कुराकर बात टाल दी। माता-पिता होने के नाते वे चाहते हैं कि बेटा अपना घर बसा ले, लेकिन वे उस पर कोई दबाव नहीं डालेंगे। अभिजीत के घर लौटने के बाद इस विषय पर फिर चर्चा होगी। हालिया आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के तुरंत बाद अभिजीत के घर लौटने की योजना थी, लेकिन उन्हें टाइफाइड हो गया। इसी वजह से उनकी यात्रा टल गई और अब उनके चार-पांच दिन बाद लौटने की उम्मीद है।
'बोस्टन में अभिजीत को लगातार धमकी भरे फोन आ रहे थे'
परिवार ने बताया कि नई पार्टी के ऐलान के बाद करीब दो सप्ताह तक उन्हें छिपकर रहना पड़ा था। उस समय बोस्टन में मौजूद अभिजीत को लगातार धमकी भरे फोन आ रहे थे। कॉल करने वाले कहते थे कि अभिजीत विदेश में हैं, इसलिए भारत में रह रहे उनके माता-पिता को निशाना बनाया जाएगा। इसके बाद अभिजीत की सलाह पर परिवार करीब 15 दिन तक कोंकण में रिश्तेदारों के यहां रहा। जून के पहले सप्ताह में जब अभिजीत बोस्टन से लौटे, तब परिवार उन्हें लेने गया। फिलहाल उनका परिवार छत्रपति संभाजीनगर के वलूज इलाके में रहता है।
अभिजीत की मां ने बताया कि उन्होंने कभी घर में राजनीति में आने की कोई चर्चा नहीं की थी। परिवार को भी उनके राजनीतिक इरादों की जानकारी तब मिली, जब टीवी न्यूज चैनलों पर उनका इंटरव्यू देखा। तभी पता चला कि वह कॉकरोच जनता पार्टी बनाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बचपन में अभिजीत बहुत कम बोलते थे। स्कूल में भी उन्होंने कभी भाषण या वाद-विवाद प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया। किसी पर गुस्सा करना भी उनकी आदत नहीं थी। ऐसे में टीवी पर उन्हें तीन भाषाओं में धाराप्रवाह बोलते देखकर पूरा परिवार हैरान रह गया।
कोरोना में अभिजीत ने 15 बेघर आदिवासी परिवारों की थी मदद
अभिजीत के संवेदनशील स्वभाव का जिक्र करते हुए उनकी मां ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने करीब 15 बेघर आदिवासी परिवारों को अपने घर की पार्किंग में रहने की जगह दी थी। परिवार के राशन से उनके भोजन का भी इंतजाम किया। अभिजीत हमेशा मानते रहे हैं कि जरूरतमंदों की मदद करना इंसानियत का सबसे बड़ा धर्म है। यही सोच आगे चलकर लोगों को उनके साथ जोड़ने में काम आई।
पढ़ाई में भी अभिजीत हमेशा अव्वल रहे। उन्होंने दसवीं की परीक्षा में 96 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। उनके पिता चाहते थे कि वह सिविल इंजीनियर बनें। इसी वजह से उनका दाखिला पुणे के एक इंजीनियरिंग संस्थान में कराया गया, लेकिन वहां उनका मन नहीं लगा और उन्होंने परीक्षा दिए बिना ही पढ़ाई छोड़ दी। उनकी मां का कहना है कि बेटे पर इंजीनियरिंग करने का दबाव बनाना उनकी सबसे बड़ी गलती थी। इसके बाद उन्होंने उसे अपनी पसंद का रास्ता चुनने की पूरी आजादी दे दी।
हालिया प्रदर्शनों के दौरान अभिजीत पर हुए हमलों ने भी परिवार को काफी परेशान किया। स्याही फेंके जाने और थप्पड़ मारे जाने की घटना से उनकी मां बेहद भावुक हो गई थीं। तब अभिजीत ने उन्हें समझाते हुए कहा था कि चिंता न करें, क्योंकि अब वह सिर्फ अपने परिवार के बेटे नहीं, बल्कि देश की जनता की अमानत हैं।