इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरुषि हत्याकांड में घरेलू नौकर हेमराज की हत्या की थ्योरी के लिए सीबीआई को फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि यह ‘असंभव परिकल्पना’ और ‘साफ तौर पर बेतुका’ है। आरुषि और हेमराज की हत्या के लिए राजेश और नूपुर तलवार को बरी करते हुए अपने 273 पन्नों के फैसले में अदालत ने कहा कि अभियोजन इस बात को साबित करने में बुरी तरह विफल रहा कि तलवार दंपती ने ठोस सबूतों को नष्ट किया था।
कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत द्वारा दर्ज विरोधाभासी निष्कर्ष को कायम नहीं रखा जा सकता है। अभियोजन पक्ष के मामले का विश्लेषण करते हुए जस्टिस बीके नारायण और जस्टिस एके मिश्रा की पीठ ने सीबीआई के वकील अनुराग खन्ना की उन दलीलों के साथ सहमत होने से इंकार कर दिया कि कई गवाहों ने गौर किया था कि अपनी एकमात्र बेटी की हत्या के बाद तलवार दंपति का आचरण एक और परिस्थिति थी जो उनकी साठगांठ का संकेत देती है।
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अदालत ने कहा कि वह जांच एजेंसी की दलीलों से सहमत नहीं है ‘क्योंकि किसी दी हुई परिस्थिति में अलग-अलग लोग अलग तरीके से प्रतिक्रिया करते हैं।’ न्यायमूर्ति नारायण और न्यायमूर्ति मिश्रा ने यह टिप्पणी पिछले सप्ताह गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत के फैसले के खिलाफ नूपुर और राजेश तलवार की अपीलों को मंजूर करने के दौरान की।