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संजय सिंह बोले: राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखेगी AAP, सात बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की करेंगे मांग

Sat, 25 Apr 2026 02:11 PM IST
Pavan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बीते दिन आम आदमी पार्टी के सात सांसदों ने भाजपा में शामिल होने की घोषणा के बाद से सियासत गरम है। अब मामले में आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखने की बात कही है। संजय सिंह का कहना है कि पार्टी सभी बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने के लिए राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखेगी।
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बागी सांसदों पर संजय सिंह हमलावर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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आम आदमी पार्टी (आप) ने पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के निर्णय को असंवैधानिक बताते हुए उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की है। आप नेता संजय सिंह ने शनिवार को कहा कि पार्टी राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर इन सांसदों को उच्च सदन से अयोग्य घोषित करने का अनुरोध करेगी।
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दल-बदल विरोधी कानून का हवाला
संजय सिंह ने कहा कि दल-बदल विरोधी कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि राज्यसभा और लोकसभा में किसी भी प्रकार के विभाजन या गुट का कोई कानूनी मान्यता नहीं है, भले ही उसमें दो-तिहाई बहुमत क्यों न हो। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न तो दल-बदल विरोधी कानून और न ही संविधान की दसवीं अनुसूची किसी भी राज्यसभा या लोकसभा में विभाजन, अलग गुट या समूह को मान्यता देती है।
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आप ने विलय को बताया अवैधानिक और अवैध
आप नेता ने भाजपा में शामिल होने वाले सात सांसदों के कदम को पूरी तरह से 'अवैधानिक' और 'अवैध' बताया। उन्होंने कहा कि वे उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर इन सात सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग कर रहे हैं।
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सात सासंदों ने की पार्टी से बगावत
शुक्रवार को, आप के राज्यसभा सांसदों राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने घोषणा की थी कि वे और चार अन्य पार्टी सांसदों के साथ भाजपा में शामिल हो रहे हैं। एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, चड्ढा ने कहा था कि आप के 10 राज्यसभा सांसदों में से सात भाजपा के साथ विलय करने के लिए तैयार हैं। आप के इस कदम से राज्यसभा में राजनीतिक गरमाहट बढ़ने की उम्मीद है। पार्टी का मानना है कि सांसदों का यह कार्य दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन है और उनकी सदस्यता रद्द होनी चाहिए। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्यसभा के सभापति इस मामले में क्या निर्णय लेते हैं।

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