पेश किया। जहां आम नागरिकों को बजट से कुछ खास नहीं मिला वहीं महिलाएं बजट से काफी खुश हैं। बजट में महिला सुरक्षा के लिए 1366 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। जानिए बजट में महिलाओं के लिए क्या-क्या खास रहा।
महिला सुरक्षा के लिए 1366 करोड़ रुपए
इस बजट में महिला सुरक्षा एवं सशक्तिकरण के लिए 1366 करोड़ का प्रस्ताव किया गया है। वहीं बीते वर्ष यह 1089 करोड़ रुपए था। निर्भया फंड के लिए बीते वर्ष के सामान ही 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय पोषण मिशन को महिलाएं एवं किशोरियों को कुपोषण से बचाने के लिए शुरू किया गया था। इसके लिए 3000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो वित्त वर्ष 2018 के 1500 करोड़ से दोगुना है। इन सभफी संबंधित क्षेत्रों के लिए 24700 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो बीते वर्ष के मुकाबले 2605 करोड़ रुपए अधिक है। पिछले वर्ष 22095 करोड़ रुपए इन योजनाओं के लिए दिए गए थे।
खुशियों के हाईवे पर बजट- आलिया भट्ट
आलिया भट्ट ने बजट पर कहा- जहां तक मुझे समझ आया है बजट हर वर्ग को ध्यान में रखकर बनाया गया है। मेरी नजर में यह बजट युवाओं के लिए बेहद खास है। बजट में सरकार ने डिजिटल इंडिया की बात कही है, तो डिजिटल डिवाइसेज से तो हमारा यूथ ही सबसे ज्यादा जुड़ा हुआ है। सरकार 70 लाख नई नौकरियां देगी और जिनके पास नौकरी नहीं है, वे सरकारी मदद से उद्योग-व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। छोटे उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा। इन सबसे बेरोजगारी तो कम होगी ही न। इनकम टैक्स दरों में बदलाव नहीं होने से नौकरीपेशा लोगों को निराशा मिली है। ट्रांसपोर्ट सिस्टम में सुधार के लिए सरकार ने कई घोषणा की हैं। मुंबई की लोकल ट्रेन का दायरा बढ़ाने से लेकर देश में नई ट्रेन लाइन बिछाने की घोषणा, नए एयरपोर्ट, सड़कों में सुधार की घोषणा राहत भरी है। सरकार ने नए मेडिकल कॉलेज खोलने, गरीबों को मकान देने और स्वास्थ्य बीमा की घोषणा कर गरीबों को राहत दी है। किसानों की फसल का समर्थन मूल्य बढ़ाना भी किसानों के लिए अच्छी खबर है। कुल मिलाकर राहत भरे इस बजट पर अमल किया जाए तो पगडंडी पर चलने वाली जिंदगी हाईवे पर आ जाएगी।
महिलाओं को बजट में दरकिनांर किया गया- डॉ. रंजना कुमारी, निदेशक सेंटर फॉर सोशल रिसर्च
सरकार महिला सश्क्तिकरण पर जोर देकर आधी आबादी को खुश करने का प्रयास कर रही है। यह आशा की जा रही थी कि सरकार महिलाओं केलिए खजाना खोलेगी। लेकिन बजट में महिलाओं खासकर महिला सुरक्षा को दरकिनार कर दिया गया है। दुर्भाग्य की बात है कि बजट में महिला सशिक्तकरण की बात कहीं नहीं दिख रही। महिला सुरक्षा के लिए निर्भया फंड में बढ़ोतरी नहीं की गई। टैक्स स्लैब में बदलाव किए जाने, कामकाजी महिलाओं के लिए वर्किंग वूमेन हॉस्टल बना कर लाभ पहुंचाने की कोशिश नहीं की गई। महिलाओं के लिए ईपीएफ की सीमा को 8 फीसदी किया गया है। इससे व सेनिटेशन पर आए बजट से शायद महिलाओं को थोड़ा लाभ मिले।
बजट सुनने के बाद दिव्यांग एवरेस्ट विजेता, अरुणिमा सिन्हा ने कहा
- चिकित्सा सुविधाओं की महिलाओं को सबसे ज्यादा जरुरत होती है। एक युवा पुरुष शायद अस्पताल में भर्ती न हो, लेकिन सामान्य तौर पर प्रसव के समय महिला भर्ती जरूरत होती है। अगर सरकार पांच रुपए तक का खर्च उठा रही है तो इसका बड़ा हिस्सा उनके काम आएगा। वहीं सरकार ने लड़कियों व महिलाओं को घरो तक सीमित रखने के बजाए मानव संसाधन के रूप में पहचाना है। पीएफ में सहूलियत इसका सबूत है। वे घरों में सीमित न रहें, बल्कि देश और अर्थव्यवस्था के निर्माण व विकास में योगदान दें। यह मंशा साफ नजर आ रही है। मेरा मानना है कि देश के बदलने की शुरुआत हो चुकी है। हम भी इसके लिए तैयार है।