दिल्ली के उपराज्यपाल की शक्तियां बढ़ाने का प्रस्ताव अगर संसद से पास होकर कानून बन जाता है तो आम आदमी पार्टी इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी और इस कानून को निरस्त करने की मांग करेगी। मामले के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने तक आम जनसभाओं के जरिए इस मुद्दे को उठाया जाएगा और इस मुद्दे पर जनता का समर्थन मांगा जाएगा। यह मामला केवल दिल्ली में ही नहीं, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड जैसे राज्यों में भी उठाया जाएगा। मुद्दे पर विरोध जताने के लिए हर मंच का उपयोग किया जाएगा।
वरिष्ठ एडवोकेट माजिद मेनन ने अमर उजाला से कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पास संसद से पास किए गए किसी कानून की समीक्षा करने का अधिकार है। कानून में उपराज्यपाल और दिल्ली के मुख्यमंत्री की शक्तियां बहुत स्पष्ट हैं। जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने पहुंचा था, तब भी सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि उपराज्यपाल की शक्तियां कानून-व्यवस्था और भूमि सहित केवल तीन मुद्दों तक ही सीमित रहेगी।
मंगलवार को आम आदमी पार्टी सांसदों ने संसद भवन में गांधी प्रतिमा के सामने उपराज्यपाल संबंधी प्रस्ताव का विरोध किया। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि अरविंद केजरीवाल सरकार अपनी योजनाओं के कारण पूरे देश में खूब लोकप्रिय हो रही है। लगातार पार्टी का जनाधार बढ़ रहा है और वह नए-नए क्षेत्रों में अपनी पैठ बना रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी पूरी कोशिश के बाद भी भारतीय जनता पार्टी दिल्ली के लोगों का भरोसा नहीं जीत पाई है। यही कारण है कि आम आदमी पार्टी की ताकत को कमजोर करने के लिए केंद्र सरकार यह कानून ला रही है, ताकि अरविंद केजरीवाल आम आदमी की भलाई के लिए कोई नई योजना न लागू कर सकें।