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अमीरों के लिए हवाई जहाज तो गरीबों के लिए ट्रेन क्यों नहीं: संजय सिंह

Fri, 22 May 2020 08:09 AM IST
आसिम खान डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला

सार

  • आप सांसद संजय सिंह से अमर उजाला डॉट कॉम की विशेष बातचीत
  • संजय सिंह ने कहा- केंद्र को संसद में देने पड़ेंगे कई सवालों के जवाब
  • केंद्र के 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज को बताया लोन मेला
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आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश में लॉकडाउन लगाने से पहले राज्यों से कोई अनुमति नहीं ली, लेकिन अब मजदूरों को उनके घर वापस भेजने के लिए राज्यों से अनुमति मांगी जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र मजदूरों को उनके घर वापस पहुंचाने पर गंभीर होता तो वह रेलवे की पूरी क्षमता का उपयोग करता जिससे एक ही दिन में करोड़ों श्रमिकों को उनके घर पहुंचा दिया जाता। 

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उन्होंने आरोप लगाया कि अमीरों को देश लाने के लिए सरकार हवाई जहाज चला रही है, लेकिन गरीबों के लिए ट्रेन भी पर्याप्त संख्या में नहीं चला रही है। उन्होंने कहा कि देश में लॉक डाउन लगाने से लेकर कोरोना संकट से निबटने के कई गंभीर सवालों का जवाब संसद में देना पड़ेगा।

अमर उजाला डॉट कॉम (www.amarujala.com) से बात करते हुए आप सांसद ने कहा कि जिस समय देश में पहला लॉकडाउन लागू किया गया, अगर उसी समय मजदूरों को एक हफ्ते का समय दिया गया होता तो आज लोग अपने घरों में सुरक्षित होते और सड़कों पर भटक न रहे होते। 
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उन्होंने कहा कि इसकी जिम्मेदारी केंद्र को लेनी पड़ेगी। मजदूरों के दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर भीड़ इकट्ठे होने का पहला मामला 27-28 मार्च को सामने आया था। तब से आज तक लंबा समय बीत चुका है, लेकिन आज तक श्रमिकों को उनके घर भेजने का पर्याप्त इंतजाम नहीं किया जा रहा है, जबकि इसी दौरान सरकार अमीरों को विमानों के जरिए विभिन्न देशों से वापस लाने का अभियान चला रही है।

केंद्र द्वारा घोषित किया गया 20 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक पैकेज क्या देश की अर्थव्वस्था को गति देने में सफल रहेगा? अमर उजाला के इस सवाल पर आप सांसद ने कहा कि यह केंद्र सरकार के द्वारा केवल एक लोन मेला आयोजित किया गया था। यह कोरोना संकट में किसी की मदद नहीं कही जा सकती। जिन छोटी कंपनियों के सामान की बाजार में मांग नहीं है वे लोन नहीं लेना चाहेंगी और इसका उद्देश्य सफल नहीं होगा। वहीं बड़े कारोबारी घराने केंद्र से बड़ा लोन लेने में सफल रहेंगे जिसे बाद में नहीं चुकाया जाएगा और एनपीए-बट्टे खाते में डाल दिया जाएगा।

क्या दिल्ली पिछड़ी
दिल्ली ने शुरुआत में कोरोना का बेहतर ढंग से सामना किया था, लेकिन आरोप लग रहे हैं कि अब वह कोरोना की लड़ाई में क्यों पिछड़ रही है। इस सवाल पर आप सांसद ने कहा कि दिल्ली ने सबसे पहले बेहतर ढंग से इलाज की व्यवस्था की थी। आज भी कोरोना से मृत्यु दर के मामले में दिल्ली देश के दूसरे राज्यों से बेहतर स्थिति में है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा तब आ रहा है जबकि हम देश में सबसे ज्यादा टेस्ट कर रहे हैं।

मरकज को दोष देना मानसिक संकीर्णता
आप सांसद ने कहा कि दिल्ली या देश में कोरोना के मामलों के संक्रमण में वृद्धि के लिए किसी एक धर्म-संप्रदाय को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। यह मानसिक संकीर्णता है। केंद्र को जवाब देना चाहिए कि जब 30 जनवरी को ही कोरोना का पहला मामला सामने आ गया था, और दिल्ली में ज्याद लोगों के इकट्ठे होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था तो इतनी भारी संख्या में लोग निजामुद्दीन के मरकज में कैसे पहुंच गए।

लोगों की मदद
उन्होंने कहा कि दिल्ली के पास इस समय आर्थिक संसाधन बहुत सीमित हो गए हैं और राज्य सरकार की कमाई बहुत कम हो गई है, राज्य सरकार इस समय भी लोगों की मदद में सबसे आगे है। ऑटो चलाने वाले गरीब ड्राइवर से लेकर श्रमिकों को पांच-पांच हजार रुपये की आर्थिक मदद की गई है। रोजाना दस लाख लोगों को राशन दिया जा रहा है जबकि लाखों राशनकार्ड धारकों को राशन मुहैया कराया जा रहा है।

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