योगी आदित्यनाथ ने अपने 51 मंत्रियों के साथ शुक्रवार को लखनऊ के इकाना स्टेडियम में शपथ ग्रहण किया। उनके शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने हिस्सा लिया। योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल में समाज के सभी क्षेत्रों, वर्गों के लोगों को शामिल कर भाजपा ने एक बड़ा संकेत देने की कोशिश की है। मंत्रिमंडल में बेहद सामान्य परिवारों से आए कार्यकर्ताओं को भी शामिल कर पार्टी के गरीबों के साथ खड़ा होने का संकेत भी दिया गया है। इसे उसकी 2024 की लड़ाई की तैयारी से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
राजनीति की लड़ाई को परसेप्शन का खेल माना जाता है। जनता के मन में परसेप्शन बनाने के खेल में मीडिया का बेहतर इस्तेमाल करते हुए अपनी उपलब्धियों को बेहतर ढंग के साथ पेश करने के साथ ही विपक्ष पर हमला करना भी शामिल माना जाता है। इससे ही जनता के बीच किसी पार्टी या सरकार को लेकर सकारात्मक या नकारात्मक छवि बनती है। चूंकि भाजपा और अरविंद केजरीवाल दोनों ही दल इस मैदान के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं, दोनों ही दल अपनी सरकारों को बेहतर बताने की कोशिश करेंगे।
राजनीतिक पंडित दोनों दलों में कई समानताएं भी देखते हैं। दोनों के पास नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल के रूप में पार्टी से बड़ा चेहरा मौजूद है जो उनके लिए ब्रांड के तौर पर काम करता है। दोनों ही राष्ट्रवाद के जरिए युवाओं को लुभे की कोशिश करते हैं तो जनहितैषी योजनाएं लागू कर गरीबों के साथ खुद को खड़ा दिखाने की कोशिश भी करते हैं। ऐसे में यह देखना काफी दिलचस्प रहेगा कि जनता इनमें से किसके दावे पर भरोसा करती है और यूपी, दिल्ली, पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों में दोनों के बीच किस तरह की लड़ाई देखने को मिलती है।