वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि आधार कानून को वित्त विधेयक के तौर पर लाने के गंभीर परिणाम हुए क्योंकि इससे आधी संसद पंगु हो गई थी।
रमेश की तरफ से वरिष्ठ वकील पी. चिदंबरम मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ के समक्ष पेश हुए। उन्होंने कहा कि राज्यसभा के साथ ही राष्ट्रपति भी वित्त विधेयक पर अपनी राय नहीं रख सके थे।
चिदंबरम ने कोर्ट से कहा कि बिल को राज्यसभा की प्रभावी हिस्सेदारी के बिना और यहां तक कि राष्ट्रपति की मंजूरी के बिना पारित कराया गया। ऐसे में कोर्ट एक ऐसे बिल की रक्षा नहीं कर सकती है जोकि मूलभूत रूप से असंवैधानिक है। एक गैर मनी बिल को मनी बिल के तौर पर पारित कराने के बहुत गंभीर नतीजे हुए।
उन्होंने आधार कानून के सेक्शन 57 का भी जिक्र किया और कहा कि यह किसी भी निजी कारपोरेट संस्था को पहचान के लिए आधार डाटा के इस्तेमाल की शक्ति देता है और मनी बिल के साथ इसका संवैधानिक योजनाओं के साथ काम करने से कोई लेनादेना नहीं है।
उन्होंने आधार कानून को रद्द करने और संसद को फिर से इसको देखने की अनुमति देने की मांग की। इससे पहले कोर्ट ने कहा था कि वह इस बात की समीक्षा करेगा कि कोर्ट लोकसभा अध्यक्ष के किसी बिल को मनी बिल मानने के फैसले की जांच कर सकता है या नहीं।