सरकारी सब्सिडी या सरकारी योजनाओं का लाभ हासिल करने के लिए आधार कार्ड अब अनिवार्य हो जाएगा। विपक्ष के एकजुट विरोध को दरकिनार करते हुए सरकार ने लोकसभा में शुक्रवार को आधार बिल को मनी बिल केरूप में पारित करा लिया है। मनी बिल होने के कारण इसे राज्यसभा में पारित कराया जाना अनिवार्य नहीं है। ऐसे में इस बिल के लोकसभा में पारित होते ही देश के नागरिकों को एक विशिष्ट पहचान संख्या या आधार कार्ड के आधार ही सरकार की ओर से सेवा उपलब्ध कराने को कानूनी मान्यता मिलनी तय है।
इसे मनी बिल के रूप में पेश किए जाने का विपक्ष की ओर से तीखा विरोध हुआ। विपक्ष ने इसे सरकार की राज्यसभा को निष्क्रिय करने की साजिश करार देते हुए राष्ट्रपति का दरवाजा खटखटाने का संकेत दिया। इसके अलावा कई विपक्षी दलों ने इस बिल के प्रावधानों के कारण नागरिकों की निजता के उल्लंघन का खतरा उत्पन्न होने की आशंका जाहिर की। हालांकि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकारी योजनाओं को उचित लोगों तक पहुंचाने, भ्रष्टाचार को रोकने के लिए बिल जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि आधार का डाटा नागरिक की सहमति के बिना और बायोमैट्रिक डाटा नागरिकों की सहमति के बाजवूद साझा नहीं की जाएगी।