सरकारी योजनाओं के साथ आधार को जोड़ने से फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगी जिससे सरकारी खजाने को 2.25 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है। यूनिक आईडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) के सीईओ सौरभ गर्ग के मुताबिक, अभी तक केंद्र सरकार की 300 योजनाओं और राज्यों की 400 योजनाओं को आधार से जोड़ा जा चुका है।
प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के लिए सरकार ने आधार को जरूरी कर दिया है। इससे केंद्रीय योजनाओं में ही सवा दो लाख करोड़ की बचत हुई। अगर राज्यों के लाभ को जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा और बड़ा हो जाएगा। इससे न सिर्फ फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगाने में सफलता मिली, बल्कि सरकारी योजनाओं तक लोगों की पहुंच भी आसान बनी है। ग्रामीण क्षेत्र में वित्तीय सुविधाओं और जीवन सुगमता बढ़ाने में आधार की अहम भूमिका रही है।
आधार से सुविधा-सुरक्षा दोनों बढ़ाने का लक्ष्य
गर्ग ने कहा, आधार के जरिये हम सुविधा और सुरक्षा दोनों बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। एक दशक में कई मील के पत्थर तय किए। अब आधार की दूसरी पारी शुरू करेंगे, जिसमें मुख्य रूप से चार लक्ष्य पर काम करना है।
- आधार अपडेट करने के लिए 1.5 लाख पोस्टमैन गांव-गांव जाएंगे, 50 हजार नए केंद्र खुलेंगे जो 6.5 लाख गांवों तक सुविधा पहुंचाएंगे।
- आधार के लिए एप बना रहे, जहां जानकारियां अपडेट करना आसान होगा और लेनदेन भी कर सकेंगे।
- आधार को पैन, सिम, राशन कार्ड व खाते से लिंक करेंगे, जिससे धोखाधड़ी व अन्य अपराधों पर रोक लगेगी।
- आधार को एआई, ब्लॉकचेन, मशीन लर्निंग से जोड़ा जाएगा, सूचनाओं की निजता बरकरार रहेगी।