आधार बेहद जरूरी है। ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जब आधार ने अपनों से बिछुड़ने वाले लोगों को फिर मिलवाया है। कुछ ऐसी ही सच्ची घटना है कि मध्य प्रदेश के रहने वाले ‘अमन’ की, जो मानसिक रूप से इतने कमजोर थे कि वह न तो अपने बारे में किसी को कुछ बता सकते थे और न ही ठीक से बोल पाते थे।
अमन 10 साल पहले आठ साल के थे, जब वह मध्य प्रदेश के जबलपुर से गायब हो गए थे। 2015 में पुलिस को अमन रेलवे स्टेशन पर मिले, जो उसे अनाथालय लेकर आई।
अच्छी बात यह थी कि 2011 में लापता होने से पहले उसके मां-बाप ने आधार में उसका पंजीकरण करा दिया था, जिससे आखिरकार उसका पता लगाया जा सका। एक स्कूल में दाखिला दिलाने की बारी आई तो आधार से पता चला कि अमन के असली माता-पिता कौन हैं।
18 साल के हो चुके अमन को बीते 30 जून को उनके माता-पिता से मिलवाया गया। अमन को उनके माता-पिता से मिलवाने वाले समर्थ दामले ने बताया कि जब अमन मिला तो वह बड़ी मुश्किल से अम्मा-अम्मा बोल पाता था। उसे 2015 तक अनाथालय में रखा गया, जिसे खुद दामले चलाते थे। दामले ने दिन-रात एक करके आधार के जरिये अमन के माता-पिता का पता लगाने की ठानी और वह इसमें कामयाब रहे।
2015 में अनाथालय बंद हुआ तो देखभाल करने वाला बना मसीहा
दरअसल, 2015 में जब किसी वजह से अनाथालय बंद हो गया तो उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं रहा। ऐसे में दामले उसे अपने घर लेकर आए और परिवार के एक सदस्य के रूप में रखा। दामले के परिवार में एक बेटा और बेटी हैं। दामले ने अमन को इस साल जून में एक स्थानीय स्कूल में 10वीं में दाखिला दिलवाया।
बॉयोमीट्रिक मसले के चलते नहीं हो रहा था पंजीकरण
दाखिले के वक्त अमन के आधार की जरूरत पड़ी तो उन्होंने उसका आधार बनवाने की कोशिश की। मगर, जैसे ही आधार पंजीकरण करवाने का प्रयास किया गया, बॉयोमीट्रिक मसले के चलते पंजीकरण नहीं हो पा रहा था।
उसके बाद दामले ने नागपुर के मानकपुर इलाके में आधार कार्यालय से संपर्क साधा, जहां उन्हें पता लगा कि अमन का आधार पंजीकरण तो पहले से ही हो चुका है और उसका असली नाम मोहम्मद आमिर है। आधार पंजीकरण से ही अमन और मोहम्मद आमिर की फोटो मेल खा गई।
उसके बाद अमन के जबलपुर के हनुमानताल में रहने वाले असली माता-पितासे संपर्क किया गया, जो वहां पर खानपान की दुकान चलाते हैं। आखिरकार सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अमन को उसके माता-पिता को सौंप दिया गया।