चुनाव आयोग ने आधार डाटा लीक होने पर मतदाता पंजीकरण अधिकारियों के खिलाफ गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है। आयोग ने इस बात पर भी जोर दिया है कि मतदाताओं द्वारा आधार जमा करना 'स्वैच्छिक' है। बता दें कि हाल ही में केंद्र सरकार ने मतदाता सूची के साथ आधार विवरण को जोड़ने की अनुमति देने के लिए मतदाता पंजीकरण नियमों में संशोधन किया था।
दरअसल सोमवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य चुनाव अधिकारियों को चुनाव आयोग ने एक पत्र भेजा। इस पत्र में कहा गया कि विशेष सारांश संशोधन के दौरान विशेष अभियान तिथियों के साथ मेल खाने वाली तिथियों पर क्लस्टर स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जा सकते हैं। जहां मतदाताओं को राजी किया जा सकता है। हार्ड कॉपी में फार्म-6 बी में स्वेच्छा से अपना आधार नंबर दें।
फार्म-6 का इस्तेमाल कर अपना आधार नंबर साझा कर सकता है मतदाता
कानून मंत्रालय की एक अधिसूचना के मुताबिक हाल ही में पेश किए गए फार्म-6 बी का उपयोग करके मौजूदा मतदाता अपना आधार नंबर साझा कर सकते हैं। इसमें कहा गया है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (43) की धारा 23 की उपधारा (5) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार 1 अप्रैल 2023 को उस तारीख के रूप में अधिसूचित करती है जिस दिन या उससे पहले प्रत्येक व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल है। वह उक्त धारा के अनुसार अपना आधार नंबर सूचित कर सकता है।
मामले में एक वरिष्ठ अधिकारी ने हाल ही में बताया था कि 'अधिसूचना में हो सकता है' का इस्तेमाल किया गया है, न कि 'होगा' जो विवरण साझा करे को स्वैच्छिक बनाता है।
आधार संख्या प्रस्तुत करना स्वैच्छिक है, अनिवार्य नहीं
पत्र में कहा गया है कि आधार संख्या प्रस्तुत करना विशुद्ध रूप से स्वैच्छिक है। चुनाव पंजीकरण अधिकारी मतदाताओं को यह स्पष्ट कर देगा कि आधार संख्या प्राप्त करने का उद्देश्य मतदाता सूची में उनकी प्रविष्टियों के प्रमाणीकरण और बेहतर विस्तार के लिए है। भविष्य में उन्हें चुनावी सेवाएं..इस बात पर जोर दिया जाता है कि मतदाताओं द्वारा आदार जमा करना स्वैच्छिक है।
पत्र में दोहराया गया है कि चुनाव कानून (संशोधन) अधिनियम 2021 में उल्लेख किया गया था कि ईआरओ किसी भी मौजूदा मतदाता की आधार संख्या प्रस्तुत करने में असमर्थता के आधार पर मतदाता सूची में किसी भी प्रविष्टि को नहीं हटाएगा।