देश में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और इस जानलेवा महामारी की वैक्सीन अभी भी दूर की कौड़ी लग रही है। ऐसे में कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी काफी कारगर साबित हो रही है। कई मरीज इस इलाज के बाद ठीक हुए हैं। लेकिन, इस इलाज के लिए प्लाज्मा डोनर (दाता) ढूंढने की, यह अभी भी एक चुनौती है।
दिल्ली के रहने वाले अद्वितीय मल के पिता जब कोरोना वायरस से संक्रमित हुए तो चिकित्सकों ने उनके इलाज के लिए प्लाज्मा थेरेपी का सुझाव दिया। अद्वितीय के परिवार को प्लाज्मा दाता खोजने में चार दिन लग गए। इस काम में अस्पताल ने भी उनकी मदद की। आखिर में काफी मशक्कत करने के बाद उन्हें एक दाता मिला जिसने प्लाज्मा डोनेट किया।
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टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना के बाद अद्वितीय ने सोचा कि प्लाज्मा थेरेपी से इलाज तो हो सकता है लेकिन प्लाज्मा डोनर ढूंढना काफी मुश्किल है। ऐसे में उन्होंने एक ऐसा मंच तैयार करने का फैसला लिया जो मरीजों और डोनर के बीच समय पर संपर्क स्थापित कर सके। अद्वितीय कहते हैं, जब इलाज की बात आती है तो समय बहुत महत्वपूर्ण कारक होता है।
अपने इस विचार को साकार करने के लिए अद्वितीय ने अपने बचपन के दोस्त मुकुल पाहवा से एक वेबसाइट बनाने के लिए संपर्क किया। कुछ दिनों की मेहनत के बाद दोनों ने ढूंढ डॉट कॉम ( www.dhoondh.com ) नामक वेबसाइट तैयार की। अद्वितीय बताते हैं वेबसाइट पर कुछ दिन में ही उत्साहित करने वाले परिणाम सामने आए हैं।
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अभी तक इस वेबसाइट पर 150 मरीज और 80 प्लाज्मा डोनर पंजीकरण करवा चुके हैं।37 वर्षीय अद्वितीय कहते हैं, मैं इस समस्या से गुजर चुका हूं और समझता हूं कि समय पर प्लाज्मा डोनर ढूंढना कितना कठिन काम साबित हो सकता है। हमें डोनर ढूंढने में काफी समय लगा और हम वहीं चाहते की बाकी लोगों को भी इस समस्या से गुजरना पड़े।
इस वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए व्यक्ति को अपनी संपर्क की जानकारियों के साथ अपने ब्लड ग्रुप, कोविड से ठीक होने की स्थिति और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देनी होती है। अद्वितीय ने कहा कि प्लाज्मा डोनेट करने के लिए कई मानक होते हैं, अगर किसी डोनर का प्लाज्मा इस मानक पर खरा नहीं उतरता है तो उसका प्लाज्मा मरीज में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।