कहते हैं किसी भी शख्स की पहली पहचान उसका नाम होता है। किसी से पहली बार मिलने पर आप उसे अपना नाम बताते हैं लेकिन क्या हो अगर आपका नाम एशिया हो और आपके भाईयों का नाम जापान, अमेरिका, रशिया और अफ्रीका हो? आप सोचेंगे भई ऐसा कैसे हो सकता है। मगर यकीन मानिए यह सच है। दरअसल, कुमार भाईयों के नाम उनके पैरेंट्स ने देशों और महाद्वीपों के नाम पर रखे हैं। यह भी उनके निकनेम नहीं बल्कि असली नाम हैं।
एशिया कुमार दिल्ली के एक निजी बैंक में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि वह 6 भाई हैं। जिसमें से रशिया और पृथ्वी दिल्ली में, अफ्रीका मुंबई में, जापान चंढीगढ़ में और भारत उड़ीसा के बालनगीर जिले में अपने गांव में रहता है। छठवें भाई अमेरिका की साल 2002 में मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि जब हम अपना नाम बताते हैं तो लोगों को विश्वास ही नहीं होता है। उन्हें लगता है कि हम मजाक कर रहे हैं।
एशिया कुमार ने बताया कि गांव को छोड़ दें तो अपने नाम की वजह से शहर में रहना उनके लिए आसान नहीं था। जैसे ही उन्होंने कमाई के लिए गांव छोड़ा उन्हें अहसास हुआ कि उनके नाम में बहुत कुछ है। उन्होंने बताया कि कैसे अपने नाम की वजह से उन्हें अपने भारतीय होने और देशभक्ति को साबित करना पड़ता है। अफ्रीका कुमार ने कहा- जब मैं फोन पर लोगों से कहता हूं कि मेरा नाम अफ्रीका है तो वह कहता है कि मैं अमेरिका बोल रहा हूं।
जापान कुमार ने बताया कि उनके नामों के पीछे उनके पिता की निराश महत्वाकांक्षाएं हैं। गांव में मशहूर और पेशे से टेलर कुलमानी पूरी दुनिया की यात्रा करना चाहते थे मगर गरीबी की वजह से ऐसा नहीं कर पाए। जिसके बाद उन्होंने अपने बेटों का नाम देश और द्वीपों के नाम पर रख दिया। इस वजह से हमारा घर दुनिया और पिता उसके निर्विवाद मास्टर बन गए।
एशिया कुमार ने बताया कि उनके पिता नाम की इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपने पोतों/पोतियों का नाम भी रखना चाहते थे। उन्होंने अमेरिका के बेटे का नाम वाशिंगटन रखने का सुझाव दिया था लेकिन हमने उसे सागर नाम दिया। इसी तरह जापान कुमार ने अपनी बेटी का नाम क्रिस्टिना रखा है। बेशक हमने अपने पिता की सलाह नहीं मानी लेकिन वह हम सभी से बराबर प्यार करते थे।