महाराष्ट्र में कोरोना के दैनिक संक्रमित मामले भले ही कम आ रहे हों लेकिन राज्य में कोरोना से संबंधित एक चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है। महाराष्ट्र के सिविल सर्जन सुनील पोखरना का कहना है कि राज्य में 18 साल से कम उम्र वाले बच्चे काफी संख्या में कोरोना की चपेट में आ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की माने तो मई महीने में महाराष्ट्र में 9928 बच्चे कोरोना से संक्रमित हुए हैं। इतना ही नहीं, इससे पहले अप्रैल महीने में 7,760 बच्चे, जिनकी उम्र 18 साल से कम है, कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं। सिविल सर्जन का कहना है कि बच्चों में संक्रमण दर इसलिए बढ़ी क्योंकि कुल संक्रमण दर ही बढ़ गई थी।
उन्होंने आगे कहा कि अभी तक बच्चों में कोई गंभीर मामला नहीं दर्ज किया गया है। हालांकि उद्धव ठाकरे ने अभी से इस स्थिति को लेकर सक्रियता दिखानी शुरू कर दी है और जिला प्रशासन को स्थिति से निपटने के लिए रणनीति बनाने का आदेश दे दिया है। इसके अलावा राज्य सरकार ने अहमदनगर जिला प्रशासन को आदेश दिया कि वो बच्चों के लिए पहले से वॉर्ड बनाकर तैयार रखें और जरूरी दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करे।
बता दें कि ऐसा आशंक जताई जा रही है कि कोरोना की तीसरी लहर में सबसे ज्यादा प्रभाव इस बार बच्चो को पड़ेगा। बता दें कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर की पीक अब निकल चुकी है और देश में दैनिक कोविड-19 के मामले धीरे-धीरे कम हो रहे हैं।
देश में कोरोना वायरस की तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच महाराष्ट्र के अहमदनगर में मई महीने में करीब 10 हजार नाबालिग संक्रमित पाए गए। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि इनमें से 95 प्रतिशत में महामारी के कोई लक्षण नहीं थे, लिहाजा हालात काबू में रहे।
केवल मई माह में ये मामले आए सामने, हालांकि 95 प्रतिशत नाबालिगों में कोई लक्षण नहीं
जिलाअधिकारी राजेंद्र भोसले के मुताबिक, पिछले महीने अहमदनगर में संक्रमण के 86,182 मामले सामने आए थे। जिनमें से 9,928 नाबालिक थे, इनमें 6,700 नाबालिगों की उम्र 11 से 18 साल, 3100 की 1 से 10 साल और कुछ बच्चे तो 1 साल से भी छोटे थे। 95 फीसदी से ज्यादा नाबालिगों में संक्रमण के लक्षण नहीं होने से चिंता की कोई बात नहीं है। हालांकि संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका के चलते बच्चों पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी है।
इस बीच अहमदनगर के बाल लोग टास्कफोर्स के सदस्य डॉक्टर सचिन सोलाट ने बताया नाबालिगों की यह तादाद काफी अधिक है। लेकिन हालात चिंताजनक कतई नहीं है। इतनी बड़ी संख्या में नाबालिगों के संक्रमित होने का कारण पूछे जाने पर डॉक्टर सोलाट ने बताया कि अधिकतर बच्चों में अभिभावकों या परिवार के अन्य वयस्क सदस्यों से संक्रमण पहुंचा है। तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर 10 बाल रोग विशेषज्ञ की टास्कफोर्स बना दी गई है।