1 इंजेक्शन, कीमत 17 करोड़ रुपए, स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) बीमारी से पीड़ित बच्चों को 2 साल की उम्र पूरी करने से पहले यह इंजेक्शन जोलगेंस्मा प्रमुख विकल्प है। एसएमए का एक नया मामला हैदराबाद में सामने आया है, जिसमें 15 महीने के बच्चे को जोलगेंस्मा की जरूरत है। इस इंजेक्शन को लेकर इसकी कीमत की वजह से सभी की उत्सुकता बढ़ गई है। इसे भारत में अब तक 90 बच्चों को दिया जा चुका है। वह भी तब, जब इसे बीमारी को पूरी तरह ठीक करने के लिए उपयुक्त भी नहीं माना जा रहा।
नई दिल्ली एम्स की बाल न्यूरोलॉजिस्ट शेफाली गुलाटी बताती हैं कि पश्चिमी देशों में एसएमए की वजह बनने वाले जीन 50 में से एक व्यक्ति में हैं, लेकिन भारत में यह 38 में से एक व्यक्ति में यह मिले हैं। वहीं उत्तर भारत में हुए एक अध्ययन में इसे 30 में से 1 बताया गया है। एसएमए टाइप 1 पीड़ित बच्चों को श्वसन देखभाल, फिजियोथेरेपी, ट्यूब से भोजन कराने आदि से बचाने में हाल में मदद मिली है। लेकिन दुनिया भर में हर 10 हजार में 1 बच्चा एसएमए के साथ जन्म ले रहा है, जो चिंताजनक है। यह शिशु मृत्यु दर की बड़ी वजह है।
एसएमए अनुवांशिक रोग
हमारे शरीर में मोटर-न्यूरॉन का एक जटिल सर्किट है जो हमारी मांसपेशियों और ग्रंथियों को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसकी अनुवांशिक बीमारी है एसएमए। यह एसएमएन जीन में म्यूटेशन से होती है। इससे मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है और गंभीर मामलों में लकवा या मौत हो जाती है।
जोलगेंस्मा क्या है
स्विस फार्मा कंपनी नोवार्टिस ने एसएमए के इलाज के लिए इसे विकसित किया। यह 2 साल से छोटे बच्चों की मोटर न्यूरॉन कोशिकाओं में एसएमएन जीन की कार्यशील नकल पहुंचाता है। इससे उनकी मांसपेशियों का नियंत्रण व कार्य बेहतर होने लगता है। इसे केवल एक बार 1 घंटे के लिए दिया जाता है।
इतना महंगा क्यों इंजेक्शन?
इसकी वजह जोलगेंस्मा बनाने के लिए हुए विस्तृत शोध और विकास प्रक्रिया को माना जाता है। दुर्लभ रोग और महंगा होने की वजह से इसकी मांग व उत्पादन कम है इसलिए लागत बढ़ जाती है।
विकल्प इससे महंगे
जोलगेंस्मा का विकल्प इससे भी महंगा हैं। अमेरिकी एफडीए ने 2016 में स्पिराजा (न्यूसिर्नेस) इंजेक्शन को एसएमए मरीजों द्वारा उपयोग की अनुमति दी थी। लेकिन इसका एक डोज काफी नहीं, बल्कि इसे हर साल उम्र भर लेना होता है। पहला डोज 4.2 करोड़ रुपए का है और फिर हर साल 2.1 करोड़ का डोज लेना होता है। दूसरा विकल्प रिस्डापाल्म (एवरीस्डी ) है, जो 20 किलो वजनी बच्चे के लिए इसका सालाना खर्च 72.8 लाख रुपए अनुमानित है। इसे 2 महीने की उम्र से बच्चे को दिया जा सकता है।