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8वां वेतन आयोग: क्या सरकार करेगी बेसिक पे में 50% DA मर्ज? आयोग के गठन में देरी तो कर्मियों ने मांगी राहत

सार

कैबिनेट ने 8वें वेतन आयोग के तहत विचार होने वाले विषयों को मंजूरी दी। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। आयोग में एक अध्यक्ष, एक सदस्य (अंशकालिक) और एक सदस्य-सचिव शामिल होंगे। 
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8वां वेतन आयोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के विचारार्थ विषयों को स्वीकृति दे दी है। आठवां केंद्रीय वेतन आयोग, अस्थायी निकाय होगा। आयोग में एक अध्यक्ष, एक सदस्य (अंशकालिक) और एक सदस्य-सचिव शामिल होंगे। यह आयोग, अपने गठन की तिथि से 18 महीनों के भीतर अपनी सिफारिशें देगा। केंद्रीय कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि अभी बहुत सी बातें, नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी। जेसीएम की तरफ से सरकार को 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' में शामिल करने के लिए कई सुझाव दिए गए थे। उनमें से कितने सुझाव सरकार ने माने हैं, ये अभी तक पता नहीं है। अब इतना तो तय हो गया है कि 2027 की दीवाली से पहले आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का लागू होना मुश्किल है। ऐसे में कर्मचारी संगठन, सरकार के समक्ष जेसीएम के माध्यम से यह मांग रखने का विचार कर रहे हैं कि कर्मियों के वेतन और पेंशनरों के डीआर में 50 प्रतिशत डीए को मर्ज किया जाए। इतना ही नहीं, सभी कर्मियों और पेंशनरों को अंतरिम राहत भी प्रदान की जाए। 

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नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड) की ज्वाइंट कन्सलटेटिव मशीनरी फॉर सेंटर गवर्नमेंट एम्पलाइज 'जेसीएम' के सदस्य और अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी. श्रीकुमार ने बताया कि इस बार आठवें वेतन आयोग के गठन में एक साल की देरी हो गई है। आयोग को 18 महीनों के भीतर अपनी सिफारिशें देनी है। मतलब, 2027 की दीवाली से पहले आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का लागू होना मुश्किल है। सरकार ने अभी तक 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' की जानकारी नहीं दी है। पुरानी पेंशन बहाली को लेकर सरकार मौन है। आठवें वेतन आयोग के गठन में ओपीएस का जिक्र ही नहीं हैं। पुराने पेंशनरों को वेतन आयोग का लाभ मिलेगा या नहीं, इस पर संशय की स्थिति है।  

कर्मचारी नेता के मुताबिक, आठवें वेतन आयोग के 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' पर बहुत कुछ टिका है। एक सप्ताह के अंदर 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। 2014 में तत्कालीन डॉ. मनमोहन सिंह सरकार ने सातवें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की थी। 2016 में इसकी सिफारिशें को लागू कर दिया गया। इस हिसाब से 2024 में आठवें वेतन आयोग का गठन होना चाहिए था। सरकार ने अब आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की है। कुछ दिनों बाद आयोग के कामकाज के लिए दफ्तर अलॉट होगा। जब कामकाज शुरु होगा तो आयोग द्वारा मेमोरेंडम मांगे जाएंगे। एआईडीईएफ अब 50% महंगाई भत्ते को मूल वेतन में मिलाने, अंतरिम राहत, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) को वापस लेने और ओपीएस को बहाल करने के लिए आठवें वेतन आयोग के समक्ष जोरदार ढंग से दबाव बनाएगा, भले ही ये आधिकारिक संदर्भ शर्तों में शामिल न हों। श्रीकुमार ने कहा, हम एक विस्तृत ज्ञापन तैयार करेंगे। उसे आठवें वेतन आयोग के समक्ष जोरदार ढंग से रखा जाएगा। 
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ये भी पढ़ें: केंद्रीय कर्मियों के लिए खुशखबरी: 8वें वेतन आयोग का खाका तय, 19000 सैलरी वाले को क्या फायदा मिल सकता है जानें

केंद्रीय कर्मचारी संगठन, 'कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स' के महासचिव एसबी यादव ने बताया, वर्तमान में डीए की दर 58 प्रतिशत है। संभव है कि एक जनवरी को डीए का ग्राफ 60 या उससे अधिक हो जाए। ऐसे में सरकार को 50 फीसदी डीए, मूल वेतन में मर्ज कर देना चाहिए। कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए अंतरिम राहत भी जरुरी है।    

संभव है कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें 2027 के आखिर में लागू हों या उससे भी ज्यादा समय लग गए। वजह, 18 माह बाद जब आयोग अपनी सिफारिशें देगा तो उन्हें ग्रुप ऑफ मिनिस्टर के पास भेजा जाता है। विशेषज्ञों की राय भी ली जाती है। अभी तक के सभी वेतन आयोगों ने अपनी रिपोर्ट देने के लिए कुछ न कुछ एक्सटेंशन मांगा है। अगर ये आयोग भी एक्सटेंशन लेता है तो फिर वेतन आयोग का फायदा मिलने का इंतजार दो वर्ष तक पहुंच सकता है। 
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सी. श्रीकुमार ने कहा, सातवें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन मनमोहन सिंह सरकार ने 2014 में किया था। 2016 में इसके लागू होने से दो साल पहले ही आयोग का गठन कर दिया गया। वेतन और पेंशन संशोधन के लिए दस साल पहले से ही एक लंबी अवधि है। चौथे वेतन आयोग के बाद से, यह प्रथा रही है कि वेतन आयोग की सिफ़ारिशें हर दस साल में लागू की जाती हैं। इस प्रक्रिया को और आगे बढ़ाना अनुचित है। उन्होंने आगे बताया कि सातवें वेतन आयोग की संदर्भ शर्तों में वेतन संरचना, भत्ते और प्रतिभाओं को आकर्षित करने और बनाए रखने, दक्षता सुनिश्चित करने और तकनीकी व आर्थिक बदलावों से निपटने से जुड़े लाभों के स्पष्ट सिद्धांत शामिल थे। श्रीकुमार ने कहा, "हालांकि, आठवें वेतन आयोग की संदर्भ शर्तें, कर्मचारी कल्याण और उचित वेतन संशोधन के बजाय पूरी तरह से आर्थिक स्थितियों और राजकोषीय बाधाओं पर केंद्रित लगती हैं। 

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